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Kangra News: कृषि विवि पालमपुर ने विकसित की धान की ब्लास्ट रोधी दो नई किस्में

Tue, 27 May 2025 05:18 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Tue, 27 May 2025 05:18 AM IST
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Agricultural University developed two new blast resistant varieties of rice
पालमपुर (कांगड़ा)। चौधरी सरवण कुमार कृषि विवि पालमपुर के मलां स्थित धान एवं गेहूं अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र के वैज्ञानिकों ने धान की ब्लास्ट रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली दो नई किस्में विकसित की हैं। यह दोनों किस्में कम समय में अधिक उत्पादन देंगी। इससे किसानों की आर्थिकी मजबूत होगी।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन कुमार ने वैज्ञानिकों की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ये किस्में न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगी, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेंगी। इन किस्मों की विशेषता यह है कि इनमें ब्लास्ट रोग के खिलाफ प्राकृतिक प्रतिरोध क्षमता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कम होगा और खेती अधिक लाभदायक बन सकेगी।
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प्रदेश में धान प्रमुख फसल है और इसकी खेती 10 जिलों में होती है। हालांकि ब्लास्ट रोग, जो मैग्नापोर्थे ग्रीसिया नामक फफूंद से होता है जो धान की पैदावार में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। यह रोग पत्तों, तनों और वालियों को संक्रमित कर उत्पादन को प्रभावित करता है। नई विकसित किस्मों में पहली है हिम पालम धान-3 (एचपीआर-2865), जो औसतन 38-40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है। इसके दाने लंबे और मोटे होते हैं। दूसरी किस्म हिम पालम धान-4 (एचपीआर-3201) है, जो औसतन 40-42 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज देती है। इसके दाने बासमती जैसे लंबे और पतले होते हैं। दोनों ही किस्में मध्यम ऊंचाई की हैं और 120-130 दिनों में पककर तैयार हो जाती हैं।
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वैज्ञानिकों के अनुसार इन किस्मों की गुणवत्ता बाजार की मांग के अनुरूप है, जिससे किसानों को अच्छा मूल्य भी प्राप्त होगा। नई किस्मों को हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनुमोदन मिल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज कृषि क्षेत्र में स्थायी व समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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