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Kangra News: अधिवक्ता संशोधन बिल-2025 के विरोध उतरे वकील, 25 से कोर्ट कार्याें का करेंगे बहिष्कार
Sun, 23 Feb 2025 12:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 23 Feb 2025 12:03 AM IST
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अधिवक्ता संशोधन बिल-2025 के खिलाफ धर्मशाला बार काउंसिल के पदाधिकारी और सदस्य जिला प्रशासन को
धर्मशाला। जिलेभर के वकील केंद्र सरकार के अधिवक्ता संशोधन बिल-2025 के विरोध में उतरे हैं। कांगड़ा जिला बार एसोसिएशन धर्मशाला के अध्यक्ष तरुण शर्मा ने कहा कि यह बिल अधिवक्ताओं और आम जनता के खिलाफ है। कांगड़ा जिला बार एसोसिएशन के सदस्य 25 फरवरी से इसके विरोध स्वरूप न्यायालय के कार्याें का बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बिल के लागू होने से सरकार के पास शक्तियां होंगी और हस्तक्षेप भी बढ़ेगा।
इस बिल के विरोध में एसोसिएशन के सदस्यों ने शनिवार को जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भी भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन में बार काउंसिल में तीन सदस्य केंद्र सरकार की ओर से नामित होंगे, जिससे बार काउंसिल में सरकार का सीधे दखल होगा। वहीं, कोई अधिवक्ता हड़ताल और न्यायालय कार्याें का बहिष्कार करता है तो उसे राज्य के अधिवक्ता रोल से हटा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कोई अधिवक्ता केस हारता है तो वादी की ओर से उस पर मामला न्यायालय में चलाया जा सकेगा। इसमें अधिवक्ता को सजा और जुर्माना का प्रावधान रखा है।
इसके अलावा अब केंद्र सरकार विदेशी लॉ फर्म को भारत में वकालत का कार्य करने की अनुमति देने के लिए नियम बना सकेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी प्रावधान, नियम अथवा आदेश लागू करने के लिए बार काउंसिल को दिशा-निर्देश दे सकेगी। ऐसे में यह बिल लोकतंत्र के खिलाफ है। केंद्रीय बार काउंसिल के निर्देशानुसार देश भर में अधिवक्ता संशोधन बिल का विरोध किया जाएगा।
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इस बिल के विरोध में एसोसिएशन के सदस्यों ने शनिवार को जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को ज्ञापन भी भेजा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन में बार काउंसिल में तीन सदस्य केंद्र सरकार की ओर से नामित होंगे, जिससे बार काउंसिल में सरकार का सीधे दखल होगा। वहीं, कोई अधिवक्ता हड़ताल और न्यायालय कार्याें का बहिष्कार करता है तो उसे राज्य के अधिवक्ता रोल से हटा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि कोई अधिवक्ता केस हारता है तो वादी की ओर से उस पर मामला न्यायालय में चलाया जा सकेगा। इसमें अधिवक्ता को सजा और जुर्माना का प्रावधान रखा है।
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इसके अलावा अब केंद्र सरकार विदेशी लॉ फर्म को भारत में वकालत का कार्य करने की अनुमति देने के लिए नियम बना सकेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसी प्रावधान, नियम अथवा आदेश लागू करने के लिए बार काउंसिल को दिशा-निर्देश दे सकेगी। ऐसे में यह बिल लोकतंत्र के खिलाफ है। केंद्रीय बार काउंसिल के निर्देशानुसार देश भर में अधिवक्ता संशोधन बिल का विरोध किया जाएगा।
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