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Kangra News: सड़क हादसे का आरोपी चालक नौ साल बाद बरी
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धर्मशाला। करीब नौ साल पुराने सड़क हादसे के मामले में कांगड़ा की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कांगड़ा अनीता शर्मा की अदालत ने कार चालक पवन उर्फ पूर्ण चंद निवासी डूंगा बाजार कांगड़ा को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपों से बरी कर दिया जबकि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत शराब पीकर वाहन चलाने का दोषी करार देते हुए 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
जानकारी के अनुसार 21 अप्रैल, 2016 की रात करीब 10:25 बजे कच्छियारी संपर्क मार्ग स्थित सत्संग भवन के पास नैनो कार और बाइक की टक्कर हो गई थी। हादसे में बाइक सवार सुरेश कुमार और राम चंद समेत कार में सवार लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चला रहा था और शराब के नशे में था।
मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। कार में मौजूद प्रत्यक्षदर्शी अशोक कुमार ने अदालत को बताया कि कार सामान्य गति से चल रही थी और अचानक टायर फटने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर बाइक से टकरा गया। यदि टायर न फटता तो हादसा नहीं होता।
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अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि हादसा आरोपी की लापरवाही या तेज रफ्तार के कारण हुआ। गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए और कई गवाह पहले दिए बयानों से मुकर गए। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए आईपीसी की धाराओं से बरी कर दिया गया।
हालांकि, अदालत ने आरएफएसएल रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर माना कि आरोपी शराब के प्रभाव में वाहन चला रहा था। रिपोर्ट में आरोपी के शरीर में तय सीमा से अधिक अल्कोहल पाए जाने की पुष्टि हुई। इसी आधार पर अदालत ने उसे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत दोषी ठहराया। सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को पहली बार अपराध करने वाला और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य बताया। अदालत ने लंबी चली सुनवाई और आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने को देखते हुए उसे केवल 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर तीन दिन की साधारण कैद भुगतनी होगी।
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जानकारी के अनुसार 21 अप्रैल, 2016 की रात करीब 10:25 बजे कच्छियारी संपर्क मार्ग स्थित सत्संग भवन के पास नैनो कार और बाइक की टक्कर हो गई थी। हादसे में बाइक सवार सुरेश कुमार और राम चंद समेत कार में सवार लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने आरोप लगाया था कि आरोपी तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चला रहा था और शराब के नशे में था।
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मामले की सुनवाई के दौरान कई गवाहों के बयान अदालत में दर्ज किए गए। कार में मौजूद प्रत्यक्षदर्शी अशोक कुमार ने अदालत को बताया कि कार सामान्य गति से चल रही थी और अचानक टायर फटने के कारण वाहन अनियंत्रित होकर बाइक से टकरा गया। यदि टायर न फटता तो हादसा नहीं होता।
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अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि हादसा आरोपी की लापरवाही या तेज रफ्तार के कारण हुआ। गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाए गए और कई गवाह पहले दिए बयानों से मुकर गए। ऐसे में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए आईपीसी की धाराओं से बरी कर दिया गया।
हालांकि, अदालत ने आरएफएसएल रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्यों के आधार पर माना कि आरोपी शराब के प्रभाव में वाहन चला रहा था। रिपोर्ट में आरोपी के शरीर में तय सीमा से अधिक अल्कोहल पाए जाने की पुष्टि हुई। इसी आधार पर अदालत ने उसे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 185 के तहत दोषी ठहराया। सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपी को पहली बार अपराध करने वाला और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य बताया। अदालत ने लंबी चली सुनवाई और आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने को देखते हुए उसे केवल 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर तीन दिन की साधारण कैद भुगतनी होगी।