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Kangra News: मानवीय भूल से हो रहीं 93% सड़क दुर्घटनाएं, 118 ब्लैक स्पॉट्स चिह्नित

Thu, 08 Jan 2026 07:56 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा Updated Thu, 08 Jan 2026 07:56 AM IST
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93% of road accidents are due to human error, 118 black spots identified
धर्मशाला। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के उपलक्ष्य में बुधवार को उपायुक्त कार्यालय के एनआईसी सभागार में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त विनय कुमार ने की। उन्होंने कहा प्रदेश में लगभग 93 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं का कारण मानवीय भूल है।
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इसमें ओवर-स्पीडिंग, नशे में गाड़ी चलाना, खतरनाक ओवरटेकिंग और यातायात नियमों की अवहेलना मुख्य कारक हैं। विशेष रूप से 45 से 50 प्रतिशत हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर हो रहे हैं। एडीसी ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु और गंभीर चोटों की संख्या को कम करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिले में अब तक 118 ब्लैक स्पॉट्स यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं।
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एडीसी ने पुलिस और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि इन स्थानों पर तुरंत सुधारात्मक कार्य किए जाएं। उप-मंडल स्तर पर बनी समितियां इनकी नियमित निगरानी करेंगी ताकि हादसों की पुनरावृत्ति को शून्य किया जा सके।
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राह-वीर बनें और पाएं एक लाख तक का इनाम
बैठक में सड़क हादसे में घायल की जान बचाने वालों के लिए सरकार की राह-वीर योजना पर विशेष चर्चा हुई। जान बचाने वाले मददगार को 25 हजार रुपये और राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने पर 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। एडीसी ने घोषणा की कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले राह-वीरों को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।

1784 स्कूल बसों पर पैनी नजर, चालकों की होगी नेत्र जांच
एडीसी ने कहा कि किसी भी चालक की अस्वस्थता दुर्घटना का कारण बन सकती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त है। जिले में चल रही 1784 स्कूल बसों के चालकों की नियमित नेत्र जांच अनिवार्य कर दी गई है। साथ ही स्कूलों और अस्पतालों के पास सुरक्षित पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग (पैदल पार पथ) विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। एडीसी ने कहा कि सड़क सुरक्षा के लिए जन-जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए एनजीओ के माध्यम से सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और स्कूलों, काॅलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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