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कूहलों के आस्तित्व पर मंडराया खतरा
Updated Tue, 26 Dec 2017 12:11 AM IST
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डरोह (कांगड़ा)। प्रदेश में प्राकृतिक जल स्रोतों का दोहन करके विद्युत कंपनियां करोड़ों का लाभ कमा रही हैं। जल स्रोतों के सूखने से किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि बंजर होने के कगार पर पहुंच गई है। पालमपुर से चलने वाली कई कूहलें जो हमेशा पानी से लबालब रहती थीं, अब उनमें बरसात के दिनों में पानी देखने को मिलता है। कई कूहलें तो सूख चुकी हैं। राजस्व विभाग की फाइलों में इस क्षेत्र की अधिकतर जमीन कूहली और अव्वल कूहली दर्ज है लेकिन सिंचाई के लिए किसानों को एक बूंद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र में कूहलों में पानी न होने की वजह से लोग अब खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं। हालांकि कृपाल चंद कूहल और दिवान चंद कूहल में पानी होता था लेकिन अब ये भी सूख चुकी हैं। नालों में जलस्तर कम होने से कूहलों का भी अस्तित्व खत्म हो गया है। दर्जनों ऐसी कूहलें थीं, जिनकी किसान स्वयं देखरेख करते थे। नालों से सिंचाई के लिए पानी खेतों तक पहुंचाते थे। अब इन कूहलों का भी नामोनिशान मिट गया है। भाडलदेवी से हैंजा, बदेंई और बोदा की जमीन को सींचने वाली बदूल कूहल सूखी पड़ी हैं। वहीं सून खड्ड से निकलने वाली चारों बड़ी कूहलों का भी यही हाल है। घंगोरड़ा नाले से निकलने वाली तीनों कूहलें भी विरान हो गई हैं।
खड्डों और नालों में पानी का जलस्तर बीते दो दशकों से इतना कम हो गया है कि कूहलों में बहने वाले पानी के समान भी पानी नहीं बचा है।
स्थानीय किसान श्रवण कुमार, जगदीश चंद, पवन कुमार, रामकृष्ण, जयपाल, रमेश चंद, पुरषोतम चंद, सावित्री देवी, पवना देवी, राजकुमारी, मिलाप चंद, रामपाल, राजेंद्र प्रसाद, भीखम चंद, वंशी लाल और राजेंद्र आदि किसानों ने बताया कि नदी और नालों में पानी का स्तर कम होने से उनकी अधिकतर कूहलें सूख चुकी हैं। इसका सीधा असर उनकी कूहली जमीन पर पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि सरकार को बेहतर सिंचाई सुविधा के लिए उठाऊ सिंचाई योजनाएं मुहैया करवानी चाहिए।
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खड्डों और नालों में पानी का जलस्तर बीते दो दशकों से इतना कम हो गया है कि कूहलों में बहने वाले पानी के समान भी पानी नहीं बचा है।
स्थानीय किसान श्रवण कुमार, जगदीश चंद, पवन कुमार, रामकृष्ण, जयपाल, रमेश चंद, पुरषोतम चंद, सावित्री देवी, पवना देवी, राजकुमारी, मिलाप चंद, रामपाल, राजेंद्र प्रसाद, भीखम चंद, वंशी लाल और राजेंद्र आदि किसानों ने बताया कि नदी और नालों में पानी का स्तर कम होने से उनकी अधिकतर कूहलें सूख चुकी हैं। इसका सीधा असर उनकी कूहली जमीन पर पड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि सरकार को बेहतर सिंचाई सुविधा के लिए उठाऊ सिंचाई योजनाएं मुहैया करवानी चाहिए।
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