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हक की लड़ाई लडने को मजबूर भूतपूर्व सैनिक
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:58 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। देश की सरहदों की रक्षा के लिए जीवन का अहम समय देने वाले हजारों पूर्व सैनिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ रहा है। हालांकि, एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत पूर्व सैनिकों से रिटायरमेंट पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए 20 से 60 हजार रुपये तक अंशदान लिया जाता है। इसके बावजूद ईसीएचएस के तहत नूरपुर उपमंडल के तकरीबन दस हजार सैन्य परिवारों की पॉली क्लीनिक खोलने की चिरलंबित मांग पूरी नहीं हो पाई है। इस कारण हजारों सैन्य परिवारों को चिकित्सा सुविधा के लिए 25 से 65 किलोमीटर दूर पठानकोट जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, वर्ष 1996 से पूर्व सेवानिवृत्त पूर्व सैनिकों को ईसीएचएस स्कीम में शामिल करने के बाद 100 रुपये प्रतिमाह मिलने वाला मेडिकल भत्ता भी समाप्त कर दिया गया है, जबकि पठानकोट स्थित पॉली क्लीनिक में चेकअप या फिर टेस्ट करवाने के लिए पहले नाम दर्ज करवाना पड़ता है और इस सारी कागजी प्रक्रिया में 4 से 5 दिन लग जाते हैं। पूर्व सैनिक लीग की नूरपुर इकाई पिछले कई सालों से इस चिरलंबित मांग को लेकर संघर्ष करती आ रही है। बावजूद इसके ईसीएचएस के किसी भी अधिकारी ने उनकी सुनवाई नहीं की है। इस बाबत पूर्व सैनिक लीग (नूरपुर) के चेयरमैन रिटायर कर्नल एनएस पठानिया, सचिव कैप्टन हरि सिंह, कैप्टन जीत शर्मा, कर्नल यशपाल सिंह पठानिया, रिटायर फ्लाइट लेफ्टिनेंट सहदेव सिंह पठानिया इत्यादि का कहना है कि पूर्व सैनिक लीग की ओर से पूर्व में पॉली क्लीनिक की चिरलंबित मांग को लेकर प्रबंधक निदेशक ईसीएचएस और देहली कैंट को कई बार लिखित ज्ञापन प्रेषित किए गए, लेकिन पूर्व सैनिकों की न्यायोचित मांग पर आज दिन तक कोई गौर नहीं किया गया है, जबकि पूर्व सैनिकों ने अपनी पेंशन में से करोड़ों रुपये का अंशदान दिया है। इसके बावजूद पूर्व सैनिक स्वास्थ्य सुविधा के लिए टैक्सी कर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार जाने के बाद मोदी सरकार से पूर्व सैनिकों को पॉली क्लीनिक की चिरलंबित मांग पूरी होने की आस जगी थी, लेकिन भूतपूर्व सैनिकों की कोई सुनवाई नहीं हो पाई।
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नूरपुर (कांगड़ा)। देश की सरहदों की रक्षा के लिए जीवन का अहम समय देने वाले हजारों पूर्व सैनिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ रहा है। हालांकि, एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) के तहत पूर्व सैनिकों से रिटायरमेंट पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए 20 से 60 हजार रुपये तक अंशदान लिया जाता है। इसके बावजूद ईसीएचएस के तहत नूरपुर उपमंडल के तकरीबन दस हजार सैन्य परिवारों की पॉली क्लीनिक खोलने की चिरलंबित मांग पूरी नहीं हो पाई है। इस कारण हजारों सैन्य परिवारों को चिकित्सा सुविधा के लिए 25 से 65 किलोमीटर दूर पठानकोट जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, वर्ष 1996 से पूर्व सेवानिवृत्त पूर्व सैनिकों को ईसीएचएस स्कीम में शामिल करने के बाद 100 रुपये प्रतिमाह मिलने वाला मेडिकल भत्ता भी समाप्त कर दिया गया है, जबकि पठानकोट स्थित पॉली क्लीनिक में चेकअप या फिर टेस्ट करवाने के लिए पहले नाम दर्ज करवाना पड़ता है और इस सारी कागजी प्रक्रिया में 4 से 5 दिन लग जाते हैं। पूर्व सैनिक लीग की नूरपुर इकाई पिछले कई सालों से इस चिरलंबित मांग को लेकर संघर्ष करती आ रही है। बावजूद इसके ईसीएचएस के किसी भी अधिकारी ने उनकी सुनवाई नहीं की है। इस बाबत पूर्व सैनिक लीग (नूरपुर) के चेयरमैन रिटायर कर्नल एनएस पठानिया, सचिव कैप्टन हरि सिंह, कैप्टन जीत शर्मा, कर्नल यशपाल सिंह पठानिया, रिटायर फ्लाइट लेफ्टिनेंट सहदेव सिंह पठानिया इत्यादि का कहना है कि पूर्व सैनिक लीग की ओर से पूर्व में पॉली क्लीनिक की चिरलंबित मांग को लेकर प्रबंधक निदेशक ईसीएचएस और देहली कैंट को कई बार लिखित ज्ञापन प्रेषित किए गए, लेकिन पूर्व सैनिकों की न्यायोचित मांग पर आज दिन तक कोई गौर नहीं किया गया है, जबकि पूर्व सैनिकों ने अपनी पेंशन में से करोड़ों रुपये का अंशदान दिया है। इसके बावजूद पूर्व सैनिक स्वास्थ्य सुविधा के लिए टैक्सी कर जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार जाने के बाद मोदी सरकार से पूर्व सैनिकों को पॉली क्लीनिक की चिरलंबित मांग पूरी होने की आस जगी थी, लेकिन भूतपूर्व सैनिकों की कोई सुनवाई नहीं हो पाई।