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लाखों का चूना लगने के बाद जागी एमसी
Updated Fri, 15 Jun 2018 11:40 PM IST
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घर की ऊपरी मंजिल में चल रहे होटलों पर लगेगा टैक्स
घरेलु से व्यावसायिक मेें बदले जाएंगे, नगर निगम ने सभी होटल संचालकों से मांगा ब्योरा
लाखों का चूना लगने के बाद जागा धर्मशाला नगर निगम
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रॉपटी टैक्स के रूप में लाखों रुपये का चूना लगने के बाद अब नगर निगम धर्मशाला जाग गया है। शहर में घर की ऊपरी मंजिल में चल रहे होटलों को व्यावसायिक करने की तैयारी है। एमसी ने शहर के सभी होटल संचालकों से ब्योरा मांगा है।
नगर निगम ने शहर के ऐसे सभी होटल संचालकों को नई एनओसी देने की हिदायत दी है। उसके बाद होटलों को घरेलू से व्यावसायिक करने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। अगर समय रहते नगर निगम ने नियमों के तहत काम किया होता, तो अब तक लाखों रुपये प्रॉपटी टैक्स के रूप में आय हो चुकी होती। नगर निगम आयुक्त संदीप कदम ने कहा कि सभी होटल संचालकों से नई एनओसी मांगी गई है। जो होटल घरों की ऊपरी मंजिल में चल रहे थे, अब उन भवनों को व्यावसायिक किया जाएगा।
नगर निगम का फैसला सही
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बांबा ने कहा कि सभी होटल को डोमेस्टिक भवनों से कामर्शियल करने फैसला सही है। अगर जरूरत हुई तो इस मामले में एसोसिएशन भी होटल संचालकों और नगर निगम की मदद करेगी।
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हर रोज सरकार को भी लग रही सात लाख की चपत
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद लगभग 240 होटलों पर कार्रवाई हुई है। इस कारण प्रदेश सरकार को भी पीक पर्यटन सीजन में करीब सात लाख रुपये की चपत प्रतिदिन लग रही है। सीजन के दौरान प्रतिदिन पर्यटन से लगभग 40 लाख रुपये आय होती है। इसका जीएसटी के रूप में करीब सात लाख रुपये बनता है। अब इस सीजन में नगर निगम के कारण प्रदेश सरकार को भी टैक्स के रूप में घाटा उठाना पड़ा है।
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घरेलु से व्यावसायिक मेें बदले जाएंगे, नगर निगम ने सभी होटल संचालकों से मांगा ब्योरा
लाखों का चूना लगने के बाद जागा धर्मशाला नगर निगम
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। प्रॉपटी टैक्स के रूप में लाखों रुपये का चूना लगने के बाद अब नगर निगम धर्मशाला जाग गया है। शहर में घर की ऊपरी मंजिल में चल रहे होटलों को व्यावसायिक करने की तैयारी है। एमसी ने शहर के सभी होटल संचालकों से ब्योरा मांगा है।
नगर निगम ने शहर के ऐसे सभी होटल संचालकों को नई एनओसी देने की हिदायत दी है। उसके बाद होटलों को घरेलू से व्यावसायिक करने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। अगर समय रहते नगर निगम ने नियमों के तहत काम किया होता, तो अब तक लाखों रुपये प्रॉपटी टैक्स के रूप में आय हो चुकी होती। नगर निगम आयुक्त संदीप कदम ने कहा कि सभी होटल संचालकों से नई एनओसी मांगी गई है। जो होटल घरों की ऊपरी मंजिल में चल रहे थे, अब उन भवनों को व्यावसायिक किया जाएगा।
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नगर निगम का फैसला सही
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बांबा ने कहा कि सभी होटल को डोमेस्टिक भवनों से कामर्शियल करने फैसला सही है। अगर जरूरत हुई तो इस मामले में एसोसिएशन भी होटल संचालकों और नगर निगम की मदद करेगी।
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हर रोज सरकार को भी लग रही सात लाख की चपत
हाईकोर्ट के आदेशों के बाद लगभग 240 होटलों पर कार्रवाई हुई है। इस कारण प्रदेश सरकार को भी पीक पर्यटन सीजन में करीब सात लाख रुपये की चपत प्रतिदिन लग रही है। सीजन के दौरान प्रतिदिन पर्यटन से लगभग 40 लाख रुपये आय होती है। इसका जीएसटी के रूप में करीब सात लाख रुपये बनता है। अब इस सीजन में नगर निगम के कारण प्रदेश सरकार को भी टैक्स के रूप में घाटा उठाना पड़ा है।