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Kangra News: 45 दिनों में 50% जोखिमग्रस्त आबादी की होगी साय-टीबी जांच
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धर्मशाला। जिले में सभी स्वास्थ्य खंडों को 45 दिनों के भीतर चिह्नित जोखिमग्रस्त आबादी के कम से कम 50 प्रतिशत लोगों की साय-टीबी जांच सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिया गया है। जिन खंडों में जांच की रफ्तार धीमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर विशेष शिविर और सघन जांच गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
साय-टीबी (सीवाई-टीबी) जांच एक आधुनिक स्किन टेस्ट है जिसका उपयोग शरीर में टीबी के संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत यह कदम राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत उठाया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 17 अक्टूबर को सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) को समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।
यह निर्देश 16 सितंबर की राज्य स्तरीय समीक्षा और 15 अक्टूबर को धर्मशाला में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद जारी किए गए हैं। टीबी से बचाव की दवा शुरू करने से पहले सक्रिय टीबी रोग की जांच अनिवार्य होगी।
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उधर, टीबी उन्मूलन अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने खंड चिकित्सा अधिकारियों को नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए जांच, दवा की उपलब्धता और उपचार प्रक्रिया की सख्त निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
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पारिवारिक संपर्कों के आंकड़े
जिले में टीबी मरीजों के कुल 2,374 पारिवारिक संपर्कों की पहचान की गई है। इनमें से 2,208 सदस्य टीबी से बचाव की दवा ले रहे हैं। 39 संपर्कों का सक्रिय टीबी के लिए इलाज चल रहा है। 127 सदस्य अभी दवा नहीं ले रहे हैं। जिले में दवा का कवरेज 95 प्रतिशत है लेकिन प्रति फेफड़े के टीबी मरीज औसतन 1.9 पारिवारिक संपर्कों की ओर से दवा लेना यह दर्शाता है कि संपर्कों के सत्यापन और पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
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साय-टीबी (सीवाई-टीबी) जांच एक आधुनिक स्किन टेस्ट है जिसका उपयोग शरीर में टीबी के संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है।
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत यह कदम राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत उठाया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 17 अक्टूबर को सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) को समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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यह निर्देश 16 सितंबर की राज्य स्तरीय समीक्षा और 15 अक्टूबर को धर्मशाला में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद जारी किए गए हैं। टीबी से बचाव की दवा शुरू करने से पहले सक्रिय टीबी रोग की जांच अनिवार्य होगी।
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उधर, टीबी उन्मूलन अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने खंड चिकित्सा अधिकारियों को नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए जांच, दवा की उपलब्धता और उपचार प्रक्रिया की सख्त निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।
पारिवारिक संपर्कों के आंकड़े
जिले में टीबी मरीजों के कुल 2,374 पारिवारिक संपर्कों की पहचान की गई है। इनमें से 2,208 सदस्य टीबी से बचाव की दवा ले रहे हैं। 39 संपर्कों का सक्रिय टीबी के लिए इलाज चल रहा है। 127 सदस्य अभी दवा नहीं ले रहे हैं। जिले में दवा का कवरेज 95 प्रतिशत है लेकिन प्रति फेफड़े के टीबी मरीज औसतन 1.9 पारिवारिक संपर्कों की ओर से दवा लेना यह दर्शाता है कि संपर्कों के सत्यापन और पहचान को और मजबूत करने की आवश्यकता है।