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कांगड़ा के 149 अनाथ नाबालिग बच्चे करोड़ों के मालिक
Updated Wed, 26 Sep 2018 10:53 PM IST
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149 अनाथ नाबालिग बच्चे करोड़ों के मालिक
बाल संरक्षण योजना के तहत कांगड़ा जिला में किए गए सर्वे में खुलासा
दादा-दादी, नाना-नानी सहित नजदीकी रिश्तेदार कर रहे पालन-पोषण
हरीश चंद्र
धर्मशाला। सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 149 अनाथ नाबालिग बच्चे करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। इस बात का खुलासा बाल संरक्षण योजना के तहत किए सर्वे में हुआ है। तीन महीने तक चले इस सर्वे में जिला में कुल 159 नाबालिग बच्चे अनाथ मिले हैं, इनके माता-पिता की विभिन्न कारणों से मौत हो गई है, इनमें से दस बच्चे बाहरी राज्यों के हैं, जिनके नाम संपत्ति के बारे में जांच की जा रही है, जबकि 149 बच्चे कांगड़ा जिला के हैं। सर्वे के दौरान पाया गया हैं कि ये अनाथ नाबालिग बच्चे अपने, नाना-नानी, दादा-दादी, बुआ सहित नजदीकी रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं, जबकि 149 अनाथ नाबालिग बच्चों में से 12 बच्चे बाल आश्रमों में रहते हैं। फॉस्टर केयर योजना के तहत भी इन बच्चों को तय राशि प्रदान की जा रही है। उधर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी कांगड़ा केएस धीमान ने कहा कि कांगड़ा जिले के सभी खंडों में अनाथ नाबालिग बच्चों के लिए सर्वे करवाया गया। जिला में 159 अनाथ बच्चे मिले हैं, जिसमें से 10 बाहरी राज्यों के हैं। जो कांगड़ा जिला के हैं, उन्हें उनके नजदीकी रिश्तेदार देखरेख कर रहे हैं। सर्वे के बाद अनाथ बच्चों की संपत्ति के बारे में पटवारी और तहसीलदार से सुनिश्चित हुई है, जिस पर उनका हक है।
इनसेट
एक से 25 एकड़ तक भूमि है नाम
नाबालिग अनाथ बच्चों में किसी के नाम एक कनाल, तो किसी के पास 20 से 25 एकड़ तक भूमि है। इसके अलावा कई बच्चे अन्य संपत्ति के मालिक है। बाल संरक्षण विभाग अब हर तीन-चार महीने में कांउसलिंग भी करेेगा, ताकि उनके रहन-सहन के बारे में पता चलता रहे।
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बाल संरक्षण योजना के तहत कांगड़ा जिला में किए गए सर्वे में खुलासा
दादा-दादी, नाना-नानी सहित नजदीकी रिश्तेदार कर रहे पालन-पोषण
हरीश चंद्र
धर्मशाला। सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 149 अनाथ नाबालिग बच्चे करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। इस बात का खुलासा बाल संरक्षण योजना के तहत किए सर्वे में हुआ है। तीन महीने तक चले इस सर्वे में जिला में कुल 159 नाबालिग बच्चे अनाथ मिले हैं, इनके माता-पिता की विभिन्न कारणों से मौत हो गई है, इनमें से दस बच्चे बाहरी राज्यों के हैं, जिनके नाम संपत्ति के बारे में जांच की जा रही है, जबकि 149 बच्चे कांगड़ा जिला के हैं। सर्वे के दौरान पाया गया हैं कि ये अनाथ नाबालिग बच्चे अपने, नाना-नानी, दादा-दादी, बुआ सहित नजदीकी रिश्तेदारों के पास रह रहे हैं, जबकि 149 अनाथ नाबालिग बच्चों में से 12 बच्चे बाल आश्रमों में रहते हैं। फॉस्टर केयर योजना के तहत भी इन बच्चों को तय राशि प्रदान की जा रही है। उधर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी कांगड़ा केएस धीमान ने कहा कि कांगड़ा जिले के सभी खंडों में अनाथ नाबालिग बच्चों के लिए सर्वे करवाया गया। जिला में 159 अनाथ बच्चे मिले हैं, जिसमें से 10 बाहरी राज्यों के हैं। जो कांगड़ा जिला के हैं, उन्हें उनके नजदीकी रिश्तेदार देखरेख कर रहे हैं। सर्वे के बाद अनाथ बच्चों की संपत्ति के बारे में पटवारी और तहसीलदार से सुनिश्चित हुई है, जिस पर उनका हक है।
इनसेट
एक से 25 एकड़ तक भूमि है नाम
नाबालिग अनाथ बच्चों में किसी के नाम एक कनाल, तो किसी के पास 20 से 25 एकड़ तक भूमि है। इसके अलावा कई बच्चे अन्य संपत्ति के मालिक है। बाल संरक्षण विभाग अब हर तीन-चार महीने में कांउसलिंग भी करेेगा, ताकि उनके रहन-सहन के बारे में पता चलता रहे।
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