{"_id":"5a64db8a4f1c1b80268b5a67","slug":"31516559242-kangra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूरे नुरपूर क्षेत्र में सिर्फ एक दवा निरीक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूरे नुरपूर क्षेत्र में सिर्फ एक दवा निरीक्षक
Updated Sun, 21 Jan 2018 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुनीश महाजन
जसूर (कांगड़ा)। जवाली, फतेहपुर, इंदौर और नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 250 से ज्यादा मेडिकल स्टोर और क्लीनिक हैं। इनके निरीक्षण के लिए प्रदेश सरकार के तीन वर्ष पूर्व नूरपुर के सिविल अस्पताल में ड्रग इंस्पेक्टर तैनात किया गया था। इसके बाद तीन वर्षों में नूरपुर उपमंडल में भारी संख्या में नशीले कैप्सूल, प्रतिबंधित दवा बेचने वालों पर कार्रवाई की गई है।
दवा निरीक्षक कार्यालय खोलने के पश्चात पिछले तीन वर्षों में नशीले कैप्सूल और प्रतिबंधित कफ सिरप के 106 से ज्यादा मामले ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के तहत दर्ज हुए हैं। इनमें से 50 से अधिक केस नूरपुर कोर्ट में चल रहे हैं और अन्य केस कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया जारी है। इन सब का रिकॉर्ड नूरपुर सिविल अस्पताल में स्थित दवा निरीक्षक कार्यालय में रखा जाता है, लेकिन स्टाफ का टोटा होने के चलते काम प्रभावित हो रहा है। पूरा स्टाफ न होने से सेंपल लेने, लाइसेंस अपडेट करने और अन्य कागजी काम प्रभावित हो रहे हैं। अगर स्वास्थ्य विभाग नूरपुर में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करता है तो नूरपुर उपमंडल के चार विधानसभा क्षेत्रों के अलावा जसवां कोटला विधानसभा क्षेत्र को भी इस कार्यालय का फायदा मिल सकता है। उधर, सहायक ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला आरके चौधरी ने कहा कि विभाग में स्टाफ की समस्या चल ही है। प्रदेश सरकार जल्द नए दवा निरीक्षकों की तैनाती करने जा रही है।
विज्ञापन
जसूर (कांगड़ा)। जवाली, फतेहपुर, इंदौर और नूरपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 250 से ज्यादा मेडिकल स्टोर और क्लीनिक हैं। इनके निरीक्षण के लिए प्रदेश सरकार के तीन वर्ष पूर्व नूरपुर के सिविल अस्पताल में ड्रग इंस्पेक्टर तैनात किया गया था। इसके बाद तीन वर्षों में नूरपुर उपमंडल में भारी संख्या में नशीले कैप्सूल, प्रतिबंधित दवा बेचने वालों पर कार्रवाई की गई है।
दवा निरीक्षक कार्यालय खोलने के पश्चात पिछले तीन वर्षों में नशीले कैप्सूल और प्रतिबंधित कफ सिरप के 106 से ज्यादा मामले ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के तहत दर्ज हुए हैं। इनमें से 50 से अधिक केस नूरपुर कोर्ट में चल रहे हैं और अन्य केस कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया जारी है। इन सब का रिकॉर्ड नूरपुर सिविल अस्पताल में स्थित दवा निरीक्षक कार्यालय में रखा जाता है, लेकिन स्टाफ का टोटा होने के चलते काम प्रभावित हो रहा है। पूरा स्टाफ न होने से सेंपल लेने, लाइसेंस अपडेट करने और अन्य कागजी काम प्रभावित हो रहे हैं। अगर स्वास्थ्य विभाग नूरपुर में अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती करता है तो नूरपुर उपमंडल के चार विधानसभा क्षेत्रों के अलावा जसवां कोटला विधानसभा क्षेत्र को भी इस कार्यालय का फायदा मिल सकता है। उधर, सहायक ड्रग कंट्रोलर धर्मशाला आरके चौधरी ने कहा कि विभाग में स्टाफ की समस्या चल ही है। प्रदेश सरकार जल्द नए दवा निरीक्षकों की तैनाती करने जा रही है।
विज्ञापन