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टॉप बाक्स 3 प्रस्तावित
Updated Thu, 13 Sep 2018 11:38 PM IST
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58 साल में पक्की हुई सिर्फ एक किलोमीटर सड़क
टियाला-महादेव सड़क को अब भगवान ही आसरा
ज्वालामुखी उपमंडल में सरकारी उदासीनता की हद
16 वर्ष बाद 74 लाख में से 81 हजार का बजट जारी
विभू शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। फोर जी के जमाने में हिमाचल में सड़कों का काम टू जी की स्पीड से भी नहीं चल रहा है। ज्वालामुखी उपमंडल में सरकारी विकास कार्य की स्पीड का एक अजीबोगरीब नमूना सामने आया है। ज्वालामुखी उपमंडल के चंगर क्षेत्र की टियाला-महादेव सड़क पिछले 58 वर्ष बाद भी पक्की नहीं हो पाई है। हैरतअंगेज यह हैैैै कि इस सड़क की लंबाई मात्र 4 किलोमीटर है। 10 पंचायतों के बाशिंदों के लिए जीवन रेखा बनने वाली यह सड़क सरकार के लिए ज्यादा मायने नहीं रखती, इसलिए इसके निर्माण कार्य की गति ने तो कछुआ चाल की कहावत को भी पीछे छोड़ दिया है।
टियाला-महादेव सड़क का निर्माण वर्ष 1959-60 में शुरू हुआ था। उस समय लोकसभा सांसद बख्शी प्रताप सिंह ने इस कच्ची सड़क का जीप ले जाकर उद्घाटन किया था। इसके बाद इस सड़क को उस समय जिला बोर्ड में डाला गया था। उस समय लोक निर्माण विभाग का गठन नहीं हुआ था। सरकारी अनदेखी की वजह से कच्ची सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं रही फिर 42 वर्ष बाद वर्ष 2002 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद कृपाल परमार ने 80 हजार की राशि देकर एक किलोमीटर सड़क पक्की बनवाई। इसके बाद इस सड़क की कोई सुध नहीं ली गई। करीब 16 वर्ष बीतने के बाद भी 3 किलोमीटर सड़क पक्की नहीं हुई। इन वर्षों में एक किलोमीटर बनाई पक्की सड़क भी टूट गई। सड़क न बनने से महादेव गांव के लोग 20 किलोमीटर सफर तय करके तहसील मुख्यालय खुंडियंा पहुंचते हैं, जबकि टियाला से महादेव की दूरी केवल 4 किलोमीटर है।
अब सरकार ने यहां के लोगों से एक और मजाक कर दिया है। 73.65 लाख की अनुमानित लागत वाली इस सड़क के लिए सरकार ने महज 81000 रुपये का बजट जारी किया है। अब विभाग यह नहीं समझ पा रहा है कि 81000 रुपये से इस सड़क को कैसे बनाएं।
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2017 में फिर हुआ शिलान्यास, पर पैसे देना भूल गई सरकार
वर्ष 2017 में इस सड़क का फिर से शिलान्यास तत्कालीन विधायक की ओर से किया गया गया था। 4 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 73.65 लाख का अनुमानित बजट रखा गया, जिसमें से आज तक महज 81000 रुपये जारी हुए।
सीएम साहब, अब तो बना दो सड़क
स्थानीय पंचायतों के निवासी प्रधान कुशल सिंह, पूर्व बीडीसी रणजीत सिंह, पूर्व प्रधान लता देवी, बीर सिंह, अशोक कुमार, प्रवेश कुमार, मज्जन सिंह, संजय राणा, वकील सिंह, महेंद्र, अनिल, गंगा राम आदि ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुहार लगाई है कि इस सड़क को जल्द पक्का किया जाए, ताकि 10 पंचायतो के लोग लाभान्वित हो सकें। इस सड़क से जुड़ने वाली पंचायतें फगुला, जोल, मोर, लाहडू, कबाली, हरि, बड़ोग लाहड़, शुदर लाहड़, जख लाहड़, फुलबाड़ी आदि हैं जो आज तक सड़क से वंचित हैं।
बजट न होने से नहीं बनी सड़क : एक्सईएन
लोनिवि देहरा के अधिशासी अभियंता गुरचरण राणा ने बताया कि वर्ष 2017-18 में इस सड़क के लिए 81000 रुपये का बजट आया है, जबकि इसकी अनुमानित 73.65 लाख है। बजट का प्रावधान न होने के कारण सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा निर्माण कार्य करवाया जाएगा।
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टियाला-महादेव सड़क को अब भगवान ही आसरा
ज्वालामुखी उपमंडल में सरकारी उदासीनता की हद
16 वर्ष बाद 74 लाख में से 81 हजार का बजट जारी
विभू शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। फोर जी के जमाने में हिमाचल में सड़कों का काम टू जी की स्पीड से भी नहीं चल रहा है। ज्वालामुखी उपमंडल में सरकारी विकास कार्य की स्पीड का एक अजीबोगरीब नमूना सामने आया है। ज्वालामुखी उपमंडल के चंगर क्षेत्र की टियाला-महादेव सड़क पिछले 58 वर्ष बाद भी पक्की नहीं हो पाई है। हैरतअंगेज यह हैैैै कि इस सड़क की लंबाई मात्र 4 किलोमीटर है। 10 पंचायतों के बाशिंदों के लिए जीवन रेखा बनने वाली यह सड़क सरकार के लिए ज्यादा मायने नहीं रखती, इसलिए इसके निर्माण कार्य की गति ने तो कछुआ चाल की कहावत को भी पीछे छोड़ दिया है।
टियाला-महादेव सड़क का निर्माण वर्ष 1959-60 में शुरू हुआ था। उस समय लोकसभा सांसद बख्शी प्रताप सिंह ने इस कच्ची सड़क का जीप ले जाकर उद्घाटन किया था। इसके बाद इस सड़क को उस समय जिला बोर्ड में डाला गया था। उस समय लोक निर्माण विभाग का गठन नहीं हुआ था। सरकारी अनदेखी की वजह से कच्ची सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं रही फिर 42 वर्ष बाद वर्ष 2002 में तत्कालीन राज्यसभा सांसद कृपाल परमार ने 80 हजार की राशि देकर एक किलोमीटर सड़क पक्की बनवाई। इसके बाद इस सड़क की कोई सुध नहीं ली गई। करीब 16 वर्ष बीतने के बाद भी 3 किलोमीटर सड़क पक्की नहीं हुई। इन वर्षों में एक किलोमीटर बनाई पक्की सड़क भी टूट गई। सड़क न बनने से महादेव गांव के लोग 20 किलोमीटर सफर तय करके तहसील मुख्यालय खुंडियंा पहुंचते हैं, जबकि टियाला से महादेव की दूरी केवल 4 किलोमीटर है।
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अब सरकार ने यहां के लोगों से एक और मजाक कर दिया है। 73.65 लाख की अनुमानित लागत वाली इस सड़क के लिए सरकार ने महज 81000 रुपये का बजट जारी किया है। अब विभाग यह नहीं समझ पा रहा है कि 81000 रुपये से इस सड़क को कैसे बनाएं।
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2017 में फिर हुआ शिलान्यास, पर पैसे देना भूल गई सरकार
वर्ष 2017 में इस सड़क का फिर से शिलान्यास तत्कालीन विधायक की ओर से किया गया गया था। 4 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 73.65 लाख का अनुमानित बजट रखा गया, जिसमें से आज तक महज 81000 रुपये जारी हुए।
सीएम साहब, अब तो बना दो सड़क
स्थानीय पंचायतों के निवासी प्रधान कुशल सिंह, पूर्व बीडीसी रणजीत सिंह, पूर्व प्रधान लता देवी, बीर सिंह, अशोक कुमार, प्रवेश कुमार, मज्जन सिंह, संजय राणा, वकील सिंह, महेंद्र, अनिल, गंगा राम आदि ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से गुहार लगाई है कि इस सड़क को जल्द पक्का किया जाए, ताकि 10 पंचायतो के लोग लाभान्वित हो सकें। इस सड़क से जुड़ने वाली पंचायतें फगुला, जोल, मोर, लाहडू, कबाली, हरि, बड़ोग लाहड़, शुदर लाहड़, जख लाहड़, फुलबाड़ी आदि हैं जो आज तक सड़क से वंचित हैं।
बजट न होने से नहीं बनी सड़क : एक्सईएन
लोनिवि देहरा के अधिशासी अभियंता गुरचरण राणा ने बताया कि वर्ष 2017-18 में इस सड़क के लिए 81000 रुपये का बजट आया है, जबकि इसकी अनुमानित 73.65 लाख है। बजट का प्रावधान न होने के कारण सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा निर्माण कार्य करवाया जाएगा।