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उपजातियों के साथ जुड़े गद्दी शब्द: यूनियन
Updated Thu, 17 May 2018 11:52 PM IST
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उपजातियों के साथ जोड़ा जाए गद्दी शब्द : यूनियन
हिमालय गद्दी यूनियन ने मोदी को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बैजनाथ (कांगड़ा)। हिमालय गद्दी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राज कपूर की अध्यक्षता में यूनियन के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एसडीएम बैजनाथ विकास शुक्ला के माध्यम से एक ज्ञापन पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने गद्दी समुदाय की उपजातियों की मांगों को लेकर अवगत करवाया। हिमाचल प्रदेश में धोगरी, सिप्पी, हाली ,बाड़ी, लोहार और डागी उपजातियां पिछड़ी हैं। प्रदेश तरक्की कर रहा है, लेकिन गद्दी समुदाय की इन उप जातियों के लोग तरक्की से कोसों दूर हैं। इन उपजातियों के लोग जिला कांगड़ा के बैजनाथ, पालमपुर, शाहपुर, नूरपुर, धर्मशाला, जबकि चंबा के डलहौजी, चुराह और होली क्षेत्रों में निवास करते हैं। ये लोग मजदूरी में रोडी तुड़ान, लकड़ी कटान जैसे कठोर कार्य कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अब तक किसी भी सरकार का इस वर्ग की ओर ध्यान ना के बराबर है। इससे यह वर्ग पिछड़ता ही चला गया। अपनी अलग पहचान और संस्कृति होते हुए भी उपजातियों के लोग अपनी मेहनत के बल पर जी रहे हैं। धोगरी, सिप्पी, हाली ,बाड़ी, लोहार और डागी उपजातियां के पुरातन राजस्व रिकॉर्ड में यह गद्दी समुदाय से संबंध रखते थे, लेकिन, अब इन्हें इस समुदाय से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन उप जातियों के राजस्व रिकॉर्ड में दोबारा गद्दी शब्द जोड़ा जाए और इस संबंध में एक जरूरी आदेश पारित किया जाए। कांगड़ा और चंबा के इन लोगों के लिए एक अलग कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए ताकि इस समुदाय को मुख्यधारा में लाया जा सके।
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हिमालय गद्दी यूनियन ने मोदी को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बैजनाथ (कांगड़ा)। हिमालय गद्दी यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राज कपूर की अध्यक्षता में यूनियन के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एसडीएम बैजनाथ विकास शुक्ला के माध्यम से एक ज्ञापन पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने गद्दी समुदाय की उपजातियों की मांगों को लेकर अवगत करवाया। हिमाचल प्रदेश में धोगरी, सिप्पी, हाली ,बाड़ी, लोहार और डागी उपजातियां पिछड़ी हैं। प्रदेश तरक्की कर रहा है, लेकिन गद्दी समुदाय की इन उप जातियों के लोग तरक्की से कोसों दूर हैं। इन उपजातियों के लोग जिला कांगड़ा के बैजनाथ, पालमपुर, शाहपुर, नूरपुर, धर्मशाला, जबकि चंबा के डलहौजी, चुराह और होली क्षेत्रों में निवास करते हैं। ये लोग मजदूरी में रोडी तुड़ान, लकड़ी कटान जैसे कठोर कार्य कर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। अब तक किसी भी सरकार का इस वर्ग की ओर ध्यान ना के बराबर है। इससे यह वर्ग पिछड़ता ही चला गया। अपनी अलग पहचान और संस्कृति होते हुए भी उपजातियों के लोग अपनी मेहनत के बल पर जी रहे हैं। धोगरी, सिप्पी, हाली ,बाड़ी, लोहार और डागी उपजातियां के पुरातन राजस्व रिकॉर्ड में यह गद्दी समुदाय से संबंध रखते थे, लेकिन, अब इन्हें इस समुदाय से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन उप जातियों के राजस्व रिकॉर्ड में दोबारा गद्दी शब्द जोड़ा जाए और इस संबंध में एक जरूरी आदेश पारित किया जाए। कांगड़ा और चंबा के इन लोगों के लिए एक अलग कल्याण बोर्ड का गठन किया जाए ताकि इस समुदाय को मुख्यधारा में लाया जा सके।