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टैंक की सप्लाई बंद, कहां से मिलेगा पानी
Updated Fri, 22 Dec 2017 11:42 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
पालमपुर (कांगड़ा)। पालमपुर उपमंडल के लटवाला गांव में डायरिया की चपेट में दो और मरीज आ गए हैं। इन मरीजों को अस्पताल से दवाई देकर भेज दिया गया है। स्थिति पहले से नियत्रंण में है लेकिन नए मरीजों की संख्या रुक नहीं रही है। अब तक 25 लोग डायरिया की चपेट में आ चुके हैं।
प्रशासन की ओर से लटवाला गांव को जाने वाले टैंक के पानी के सप्लाई भी फिलहाल बंद कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में काम कर रही है। विभाग की टीम शुक्रवार को उन मरीजों को देखने पहुंची, जो पहले इसकी चपेट में आए थे। स्कूल का भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दौरा किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पाया कि जो मरीज डायरिया की चपेट में आए उनकी हालत अब ठीक है। अब देखना यह है कि लटवाला में डायरिया पीने के पानी के टैंक से आई रही सप्लाई से फैला है कि साथ लगती गांव की बाबड़ी से। बताया जाता है कि कई लोग गांव की बाबड़ी का पानी भी पीते हैं। हालांकि, अब इस बावड़ी की क्लोरीरेशन कर दी गई है। अब टैंक से पीने की पानी की सप्लाई बंद होने से लोगों को अब पानी की समस्या भी सताने लगी है। अब लोग बावड़ी के पानी पर निर्भर हो गए हैं। प्रशासन का कहना है कि लोग बाबड़ी का पानी प्रयोग में न लाएं। सूत्रों की मानें तो जब तक पानी के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक टैंक का पानी बंद रखा जाएगा। लेकिन, अब समस्या यह है कि लोगों को पीने का पानी दिया कहां से जाए। बीएमओ गोपालपुर ने कहा कि दो डायरिया के मरीज ओपीडी में आए थे। उनकी हालत को देख उन्हें दवाई देकर घर भेज दिया था। उधर, आईपीएच के एसडीओ त्रिलोक धीमान ने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर फिलहाल टैंक का पानी बंद किया गया है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है।
बीमारी फैलाने में लोग भी कम दोषी नहीं
पानी से भले ही कोई बीमारी फैल रही है, जिसके लिए आईपीएच विभाग या अन्य
विभागों को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन, इसके पीछे लोग भी कम दोषी नहीं
है, जो पीने के स्रोतों के पास गंदगी फेंक रहे हैं। छोटे बच्चों के डाइपर समेत अन्य गंदगी फेंकी जा रही है जो सीधे पानी में जा रहे है। लिगंटी खड्ड में भी यह हाल है। सूत्रों का कहना है कि आईपीएच विभाग भी पानी के छह सैंपल चंडीगढ़ भेज रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बावड़ी के पानी दो सैंपल भी भेज दिए हैं।
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बाबड़ी से ला रहे लोग पानी
लटवाला को 55 हजार लीटर पीने के पानी के टैंक से जा रही सप्लाई बंद होने पर लोग अब बावड़ियों से पानी पी रहे हैं। इससे लोगों को पानी की समस्या आने लगी है। प्रशासन की ओर से बावड़ियों का पानी प्रयोग न करने की बात भी कही गई है, जबकि लोग पीने का पानी उबाल कर ही पीयें ताकि बीमारी से बचा जाए। एसडीएम बलवान मंढोत्रा ने कहा कि गांव में सभी पेयजल स्रोतों की सफाई कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लोग पानी उबाल कर पीएं।
1970 में बने टैंक में नहीं आउटलेट
बगौड़ा में पेजयल टैंक 1970 में बना है। जिसमें आउटलेट ही नहीं
है। जिससे पानी की सफाई में भारी दिक्कत आती है। इस कारण यह भी संदेह जताया
जाता है कि अब तक टैंक की सफाई हुई ही नहीं है। आउटलेट होता तो इसका पानी
साफ भी हो सकता है। आईपीएच विभाग की मानें तो 1970 में ऐसी ही टैंक बनते थे।
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पालमपुर (कांगड़ा)। पालमपुर उपमंडल के लटवाला गांव में डायरिया की चपेट में दो और मरीज आ गए हैं। इन मरीजों को अस्पताल से दवाई देकर भेज दिया गया है। स्थिति पहले से नियत्रंण में है लेकिन नए मरीजों की संख्या रुक नहीं रही है। अब तक 25 लोग डायरिया की चपेट में आ चुके हैं।
प्रशासन की ओर से लटवाला गांव को जाने वाले टैंक के पानी के सप्लाई भी फिलहाल बंद कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में काम कर रही है। विभाग की टीम शुक्रवार को उन मरीजों को देखने पहुंची, जो पहले इसकी चपेट में आए थे। स्कूल का भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दौरा किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पाया कि जो मरीज डायरिया की चपेट में आए उनकी हालत अब ठीक है। अब देखना यह है कि लटवाला में डायरिया पीने के पानी के टैंक से आई रही सप्लाई से फैला है कि साथ लगती गांव की बाबड़ी से। बताया जाता है कि कई लोग गांव की बाबड़ी का पानी भी पीते हैं। हालांकि, अब इस बावड़ी की क्लोरीरेशन कर दी गई है। अब टैंक से पीने की पानी की सप्लाई बंद होने से लोगों को अब पानी की समस्या भी सताने लगी है। अब लोग बावड़ी के पानी पर निर्भर हो गए हैं। प्रशासन का कहना है कि लोग बाबड़ी का पानी प्रयोग में न लाएं। सूत्रों की मानें तो जब तक पानी के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक टैंक का पानी बंद रखा जाएगा। लेकिन, अब समस्या यह है कि लोगों को पीने का पानी दिया कहां से जाए। बीएमओ गोपालपुर ने कहा कि दो डायरिया के मरीज ओपीडी में आए थे। उनकी हालत को देख उन्हें दवाई देकर घर भेज दिया था। उधर, आईपीएच के एसडीओ त्रिलोक धीमान ने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर फिलहाल टैंक का पानी बंद किया गया है। पानी के सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार है।
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बीमारी फैलाने में लोग भी कम दोषी नहीं
पानी से भले ही कोई बीमारी फैल रही है, जिसके लिए आईपीएच विभाग या अन्य
विभागों को दोषी ठहराया जाता है। लेकिन, इसके पीछे लोग भी कम दोषी नहीं
है, जो पीने के स्रोतों के पास गंदगी फेंक रहे हैं। छोटे बच्चों के डाइपर समेत अन्य गंदगी फेंकी जा रही है जो सीधे पानी में जा रहे है। लिगंटी खड्ड में भी यह हाल है। सूत्रों का कहना है कि आईपीएच विभाग भी पानी के छह सैंपल चंडीगढ़ भेज रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने बावड़ी के पानी दो सैंपल भी भेज दिए हैं।
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बाबड़ी से ला रहे लोग पानी
लटवाला को 55 हजार लीटर पीने के पानी के टैंक से जा रही सप्लाई बंद होने पर लोग अब बावड़ियों से पानी पी रहे हैं। इससे लोगों को पानी की समस्या आने लगी है। प्रशासन की ओर से बावड़ियों का पानी प्रयोग न करने की बात भी कही गई है, जबकि लोग पीने का पानी उबाल कर ही पीयें ताकि बीमारी से बचा जाए। एसडीएम बलवान मंढोत्रा ने कहा कि गांव में सभी पेयजल स्रोतों की सफाई कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लोग पानी उबाल कर पीएं।
1970 में बने टैंक में नहीं आउटलेट
बगौड़ा में पेजयल टैंक 1970 में बना है। जिसमें आउटलेट ही नहीं
है। जिससे पानी की सफाई में भारी दिक्कत आती है। इस कारण यह भी संदेह जताया
जाता है कि अब तक टैंक की सफाई हुई ही नहीं है। आउटलेट होता तो इसका पानी
साफ भी हो सकता है। आईपीएच विभाग की मानें तो 1970 में ऐसी ही टैंक बनते थे।