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तेज रफ्तार बस चलाने पर चालक को 5 साल कैद
Updated Thu, 12 Apr 2018 12:08 AM IST
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तेज रफ्तार बस चलाने पर चालक को 5 साल कैद
मौके पर 2 की हुई थी मौत, 51 सवारियां हुईं थी घायल
सेशन जज पुरेंद्र वैद्य की अदालत ने सुनाई सजा
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। तेज रफ्तार से बस चलाने और उसके बाद बस को पेड़ से दुर्घटनाग्रस्त करने के आरोपी चालक को दोष सिद्ध होने पर पांच साल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा दोषी चालक को 10 हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना पड़ेगा। 2011 से चले इस मुकदमे पर सेशन जज पुरेंद्र वैद्य ने बुधवार को यह सजा सुनाई।
मामले की जानकारी जिला न्यायवादी राजेश वर्मा और उप जिला न्यायवादी एलएम शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में प्रमोद कुमार पुत्र बृजेश कुमार निवासी फिरोजाबाद यूपी ने बयान दिया था कि 22 जुलाई, 2011 को वे अन्य साथियों के साथ धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए दिल्ली के करोलबाग से बस में सवार होकर निकले थे। इस दौरान गोपाल कृष्ण पुत्र प्रीतम चंद निवासी नगरोटा बगवां जिला कांगड़ा बस को चला रहा था। 31 जुलाई, 2011 को जब वे ज्वालाजी मंदिर माथा टेकने के लिए आ रहे थे तो चालक ने तेज रफ्तार बस से नियंत्रण खो दिया। इसके चलते बस सड़क के साथ लगते एक पेड़ से जा टकराई थी। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 51 सवारियां घायल हुई थीं। करीब सात साल चले इस मुकदमे में अभियान पक्ष की ओर से 16 गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी चालक को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। वहीं जुर्माना न भरने करने की सूरत में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास झेलना पड़ेेगा।
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मौके पर 2 की हुई थी मौत, 51 सवारियां हुईं थी घायल
सेशन जज पुरेंद्र वैद्य की अदालत ने सुनाई सजा
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। तेज रफ्तार से बस चलाने और उसके बाद बस को पेड़ से दुर्घटनाग्रस्त करने के आरोपी चालक को दोष सिद्ध होने पर पांच साल की सजा सुनाई गई। इसके अलावा दोषी चालक को 10 हजार रुपये जुर्माना भी अदा करना पड़ेगा। 2011 से चले इस मुकदमे पर सेशन जज पुरेंद्र वैद्य ने बुधवार को यह सजा सुनाई।
मामले की जानकारी जिला न्यायवादी राजेश वर्मा और उप जिला न्यायवादी एलएम शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में प्रमोद कुमार पुत्र बृजेश कुमार निवासी फिरोजाबाद यूपी ने बयान दिया था कि 22 जुलाई, 2011 को वे अन्य साथियों के साथ धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए दिल्ली के करोलबाग से बस में सवार होकर निकले थे। इस दौरान गोपाल कृष्ण पुत्र प्रीतम चंद निवासी नगरोटा बगवां जिला कांगड़ा बस को चला रहा था। 31 जुलाई, 2011 को जब वे ज्वालाजी मंदिर माथा टेकने के लिए आ रहे थे तो चालक ने तेज रफ्तार बस से नियंत्रण खो दिया। इसके चलते बस सड़क के साथ लगते एक पेड़ से जा टकराई थी। इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 51 सवारियां घायल हुई थीं। करीब सात साल चले इस मुकदमे में अभियान पक्ष की ओर से 16 गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी चालक को दोषी करार देते हुए पांच वर्ष की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। वहीं जुर्माना न भरने करने की सूरत में दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास झेलना पड़ेेगा।
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