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डेंगू बुखार पर स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट

Wed, 13 Dec 2017 11:43 PM IST
Updated Wed, 13 Dec 2017 11:43 PM IST
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डेंगू बुखार पर स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
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धर्मशाला। प्रदेश में दो दिन से हो रही बारिश और बर्फबारी के बाद स्वास्थ्य विभाग डेंगू बुखार को लेकर अलर्ट हो गया है। सूबे के जिला केंद्र के अस्पतालों सहित मेडिकल कॉलेजों की लैबों में संभावित तौर पर दो दिन में ही 114 मरीजों का स्वास्थ्य जांचा गया। इसमें दो मरीजों में डेंगू रक्तस्रावी बुखार (डीएचएफ) पाया गया है। इनके डेंगू के (डीएसएस) की जांच की जा रही है। विधानसभा चुनाव के समय भी सूबे में डेंगू के मामले बढ़ गए थे। इस वर्ष प्रदेश भर में डीएचएफ और डीएसएस डेंगू के संभावित 3271 मरीजों के खून की जांच की गई है जिसमें से अभी 486 मरीजों में उपरोक्त डेंगू पाया गया है। हालांकि इस साल प्रदेश में इन दोनों डेंगू बुखारों से प्रदेश में किसी मरीज की मौत नहीं हुई है।

संक्रमण से फैलती है बीमारी
इस मौसम में डेंगू जैसी एक जानलेवा बीमारी भी होती है जो मच्छर के काटने से होती है। डेंगू बुखार एक वायरल एडीज एजिप्टी मच्छर से फैलने वाला संक्रमण है। अगर इस बुखार में समय पर इलाज न मिले तो मरीज की हालत गंभीर हो सकती है और उसकी जान भी जा सकती है। समय पर उपचार न मिलने से डेंगू रक्तस्रावी बुखार होने लगता है। डेंगू आघात सिंड्रोम जैसी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जिससे फेफड़े, जिगर या दिल को नुकसान पहुंच सकता है।
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जानलेवा हो सकता है बुखार
डेंगू रक्तस्रावी बुखार के लिए चार विभिन्न प्रकार के डेंगू वायरस जिम्मेदार हो सकते हैं। यह मच्छर के काटने से होने वाली समस्या है। इसमें से कुछ ही मामले डेंगू रक्तस्रावी बुखार के होते हैं। यह डेंगू का ही एक प्रकार है। डेंगू रक्तस्रावी बुखार अगर गंभीर हो जाए तो जानलेवा भी हो सकता है। बहुत से मामलों में ये बढ़े हुए जिगर यानी इनलार्ज लीवर का कारण हो सकता है। गंभीर मामलों में ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिसे डेंगू आघात सिंड्रोम कहा जाता है।
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इनसेट
डेंगू के लक्षण
डेंगू रक्तस्रावी बुखार से ग्रस्त मरीज में गंभीर पेट दर्द, नाक, मुंह, मसूड़ों या त्वचा से रक्त स्राव, खून की या बिना खून की लगातार उल्टी होती है।
कोट
-सूबे में अब डेंगू की स्थिति नियंत्रण में है। पिछले दो महीने में संभावित रोगियों का आंकड़ा बढ़ा है। सभी डेंगू ग्रस्त मरीजों का प्राथमिकता के साथ उपचार किया जा रहा है। अस्पतालों से डेंगू मरीजों को छुट्टी मिलने के बाद भी सुपरवाइजरों को बाकायदा मरीज के घर भी भेजा गया है, ताकि सही उपचार हो सके।
-डॉ सोनम नेगी, स्वास्थ्य विभाग की राज्य निगरानी अधिकारी
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