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भविष्य को लेकर चिंतित हुई बिजली मजदूर एकता यूनियन
Updated Sun, 10 Jun 2018 11:06 PM IST
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धर्मशाला में आउटसोर्स कर्मियों ने बनाई रणनीति
बिजली मजदूर एकता यूनियनभविष्य को लेकर चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। बिजली मजदूर एकता यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने रविवार को धर्मशाला में बैठक की। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के अध्यक्ष पवन शर्मा ने की। इस दौरान 10-12 सालों से बिजली बोर्ड में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों, डाटा एंट्री ऑपरेटरों, मीटर रीडर, सब स्टेशन हेल्पर, टीमेट और ड्राइवरों ने उपस्थिति दर्ज करवाई।
पवन शर्मा ने बताया कि कुछ समय से लगातार सेवाएं देने के बावजूद उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स पर अधिकतम लोग 30 से 40 तक की उम्र के हैं और सभी लोगों के परिवार उन पर निर्भर हैं। वेतन कम होने के बावजूद सभी लोग सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दिया गया वेतन कर्मचारी तक पहुंचने तक 40 प्रतिशत की कट जाता है। पवन शर्मा ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार कर्मचारियों को बहुत बड़े स्तर पर शोषण कर रहे हैं। इसके साथ-साथ ईपीएफ और न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। यूनियन की सरकार से मांग है कि कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर बिजली बोर्ड के तहत समायोजित किया जाए, ताकि सभी कर्मचारियों को भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि कर्मचारियों का ऐसा ही शोषण होता रहा तो भविष्य में बिजली मजदूर एकता यूनियन के बैनर तले मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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बिजली मजदूर एकता यूनियनभविष्य को लेकर चिंतित
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। बिजली मजदूर एकता यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने रविवार को धर्मशाला में बैठक की। बैठक की अध्यक्षता यूनियन के अध्यक्ष पवन शर्मा ने की। इस दौरान 10-12 सालों से बिजली बोर्ड में सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों, डाटा एंट्री ऑपरेटरों, मीटर रीडर, सब स्टेशन हेल्पर, टीमेट और ड्राइवरों ने उपस्थिति दर्ज करवाई।
पवन शर्मा ने बताया कि कुछ समय से लगातार सेवाएं देने के बावजूद उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स पर अधिकतम लोग 30 से 40 तक की उम्र के हैं और सभी लोगों के परिवार उन पर निर्भर हैं। वेतन कम होने के बावजूद सभी लोग सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दिया गया वेतन कर्मचारी तक पहुंचने तक 40 प्रतिशत की कट जाता है। पवन शर्मा ने आरोप लगाया है कि ठेकेदार कर्मचारियों को बहुत बड़े स्तर पर शोषण कर रहे हैं। इसके साथ-साथ ईपीएफ और न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। यूनियन की सरकार से मांग है कि कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर बिजली बोर्ड के तहत समायोजित किया जाए, ताकि सभी कर्मचारियों को भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि कर्मचारियों का ऐसा ही शोषण होता रहा तो भविष्य में बिजली मजदूर एकता यूनियन के बैनर तले मजबूरन हड़ताल पर जाना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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