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एनडीआरएफ टीम ने किया मजाक : पठानिया
Updated Tue, 10 Apr 2018 01:28 AM IST
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एनडीआरएफ टीम ने किया मजाक : पठानिया
नूरपुर। विधायक राकेश पठानिया ने घटनास्थल पर एनडीआरएफ टीम के फेल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हादसे के वक्त एनडीआरएफ टीम ने मानवता के साथ ही मजाक कर दिया। उन्होंने कहा कि हमें तो एनडीआरएफ की टीम ने ही समय पर आने के लिए मना कर दिया। एनडीआरएफ की टीम ने हमें कहा कि पहले जालंधर से परमिशन दिलवाओ तभी हम घटनास्थल पर आ सकेंगे। एनडीआरएफ की टीम हादसा स्थल पर तीन घंटे लेट पहुंची। टीम 5 बजे के बाद पहुंची। खाई में बच्चे बस में फंसे थे। लेकिन, एनडीआरएफ की टीम लेट आई। टीम के आने तक ग्रामीणों ने सभी बच्चे अस्पताल पहुंचा दिए थे।
विधायक राकेश पठानिया ने बताया कि सोमवार को हमारे लिए काला दिन था। बच्चों की माओं को बिलखते देख रौंगटे खड़े हो जा रहे थे। मैने अस्पताल में 18 बच्चे रिसीव किए। उनमें से 14 बच्चों की मौत हो गई। यह पल मेरी जिंदगी का सबसे मार्मिक पल था। छोटे छोटे बच्चों की लाशों को देखकर मन बेहद भारी हो गया था। सवा तीन से रात तक डटे रहे। उन्होंने कहा कि सारा प्रशासन उन्होंने खुद संभाला। डीसी और एसपी शाम 5 बजे पहुुंचे। उपमंडल का सारा स्टाफ 4 बजे तक बुला लिया गया था। दर्दनाक मंजर में घायल बच्चों की जान बचाने के लिए विधायक राकेश पठानिया भी डटकर अस्पताल में जुटे रहे। दोपहर करीब सवा 3 बजे पठानिया अस्पताल पहुंच गए। यहां पर पठानिया ने पूरे नूरपुर उपमंडल के स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को तुरंत अस्पताल बुला लिया। ऐसे में अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान अव्यवस्था नहीं फैली। पठानिया देर रात तक अस्पताल में डटे रहे।
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नूरपुर। विधायक राकेश पठानिया ने घटनास्थल पर एनडीआरएफ टीम के फेल होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हादसे के वक्त एनडीआरएफ टीम ने मानवता के साथ ही मजाक कर दिया। उन्होंने कहा कि हमें तो एनडीआरएफ की टीम ने ही समय पर आने के लिए मना कर दिया। एनडीआरएफ की टीम ने हमें कहा कि पहले जालंधर से परमिशन दिलवाओ तभी हम घटनास्थल पर आ सकेंगे। एनडीआरएफ की टीम हादसा स्थल पर तीन घंटे लेट पहुंची। टीम 5 बजे के बाद पहुंची। खाई में बच्चे बस में फंसे थे। लेकिन, एनडीआरएफ की टीम लेट आई। टीम के आने तक ग्रामीणों ने सभी बच्चे अस्पताल पहुंचा दिए थे।
विधायक राकेश पठानिया ने बताया कि सोमवार को हमारे लिए काला दिन था। बच्चों की माओं को बिलखते देख रौंगटे खड़े हो जा रहे थे। मैने अस्पताल में 18 बच्चे रिसीव किए। उनमें से 14 बच्चों की मौत हो गई। यह पल मेरी जिंदगी का सबसे मार्मिक पल था। छोटे छोटे बच्चों की लाशों को देखकर मन बेहद भारी हो गया था। सवा तीन से रात तक डटे रहे। उन्होंने कहा कि सारा प्रशासन उन्होंने खुद संभाला। डीसी और एसपी शाम 5 बजे पहुुंचे। उपमंडल का सारा स्टाफ 4 बजे तक बुला लिया गया था। दर्दनाक मंजर में घायल बच्चों की जान बचाने के लिए विधायक राकेश पठानिया भी डटकर अस्पताल में जुटे रहे। दोपहर करीब सवा 3 बजे पठानिया अस्पताल पहुंच गए। यहां पर पठानिया ने पूरे नूरपुर उपमंडल के स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को तुरंत अस्पताल बुला लिया। ऐसे में अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान अव्यवस्था नहीं फैली। पठानिया देर रात तक अस्पताल में डटे रहे।
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