{"_id":"59f61b354f1c1b70548b9d5d","slug":"101509301045-kangra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सियासी पालने में झूल रहा नूरपुर खेल स्टेडियम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सियासी पालने में झूल रहा नूरपुर खेल स्टेडियम
Updated Sun, 29 Oct 2017 11:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रितेश महाजन
नूरपुर (कांगड़ा)। न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी। यह कहावत करीब ढाई दशक से नूरपुर के चौगान में प्रस्तावित खेल स्टेडियम पर स्टीक बैठती है। हर बार चुनाव में स्टेडियम का मुद्दा जोर-शोर से गूंजता है और चुनाव खत्म होते ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने आज दिन तक स्टेडियम के निर्माण को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई है। हैरानी की बात यह है कि दो बार सीएम के हाथों उक्त स्टेडियम का शिलान्यास हुआ, लेकिन इसका निर्माण सरकारी फाइलों से आगे नहीं सरक पाया।
लंबी जद्दोजहद के बाद 27 अक्तूबर 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बहु प्रतिक्षित स्टेडियम के लिए 1.83 करोड़ रुपये मंजूर करने की घोषणा की। इस बार स्टेडियम का काम तो शुरू हुआ, लेकिन तत्कालीन विधायक राकेश पठानिया ने इसे एथलेटिक ट्रैक बताते हुए निर्माण पर ब्रेक लगवा दी। लिहाजा इसे क्रिकेट स्टेडियम के तौर पर विकसित करने की कवायद शुरू हुई और आखिरकार मई 2011 में धूमल सरकार की कैबिनेट ने उक्त मैदान को एचपीसीए को लीज देने की मंजूरी प्रदान कर दी। इससे पहले कि खेल प्रेमियों की चौगान में क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण की मुराद पूरी होती, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद क्रिकेट स्टेडियम का सपना उस समय चकनाचूर हो गया, जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस प्रस्तावित स्टेडियम की जमीन की लीज स्थगित करने का एलान कर दिया, लेकिन बीते चार साल में ढाक के तीन पात वाले हालात रहे और चुनावी साल में जनवरी 2017 में प्रदेश मंत्रिमंडल ने नूरपुर में क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए एचपीसीए को दी गई लीज को निरस्त कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नूरपुर में वजीर राम सिंह पठानिया के नाम से चौगान में मल्टीपर्पस स्टेडियम बनाने की घोषणा की, लेकिन स्टेडियम की लीज निरस्त करने का मसला आर्बिट्रशन में जाने से एक बार फिर स्टेडियम के निर्माण में अड़ंगा लग गया।
चार करोड़ की डीपीआर तैयार
लोनिवि नूरपुर मंडल के एक्सईएन इंद्र सिंह उत्तम ने बताया कि चौगान में प्रस्तावित वजीर राम सिंह पठानिया मल्टीपर्पज स्टेडियम की करीब 4 करोड़ लागत की डीपीआर तैयार की गई है। फिलहाल एचपीसीए की ओर से लीज का मसला आर्बिट्रेशन में ले जाने से टेंडर प्रक्रिया अटकी पड़ी है।
विज्ञापन
कब, क्या हुआ
- 16 फरवरी 1990 को पहली बार स्टेडियम का शिलान्यास।
- 13 अगस्त 1996 को दूसरी मर्तबा स्टेडियम का शिलान्यास।
- 27 अक्तूबर 2005 को स्टेडियम निर्माण को 1.83 करोड़ रुपये देने की घोषणा।
- 2007 में चुनाव से पहले चौगान में एथलेटिक ट्रैक का काम शुरू।
- 2008 में स्टीयर्ज और अन्य निर्माण को तोड़कर क्रिकेट स्टेडियम की प्रपोजल तैयार।
- 2011 में एचपीसीए को खेल मैदान लीज पर देने को कैबिनेट की मंजूरी।
- 05 मार्च 2013 को सीएम का एचपीसीए की लीज रद्द करने का एलान।
- 04 जनवरी 2017 को प्रदेश मंत्रिमंडल का स्टेडियम की लीज निरस्त करने का फैसला।
- 13 जनवरी 2017 को सीएम ने मल्टीपर्पज स्टेडियम बनाने की घोषणा की ।
बाक्स
पहले सेना के अधीन थी जमीन
नूरपुर में प्रस्तावित खेल स्टेडियम की जमीन पर पहले भारतीय सेना का कब्जा था, लेकिन 90 के दशक में तत्कालीन सांसद सत महाजन ने खेल प्रेमियों की मांग पर स्टेडियम निर्माण के लिए अपनी सांसद निधि से इसकी उचित कीमत चुकाकर जमीन को खेल विभाग के नाम करवाया। साथ ही स्टेडियम निर्माण के लिए 12.84 लाख रुपये की धनराशि भी मुहैया करवाई थी।
विज्ञापन
नूरपुर (कांगड़ा)। न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी। यह कहावत करीब ढाई दशक से नूरपुर के चौगान में प्रस्तावित खेल स्टेडियम पर स्टीक बैठती है। हर बार चुनाव में स्टेडियम का मुद्दा जोर-शोर से गूंजता है और चुनाव खत्म होते ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने आज दिन तक स्टेडियम के निर्माण को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई है। हैरानी की बात यह है कि दो बार सीएम के हाथों उक्त स्टेडियम का शिलान्यास हुआ, लेकिन इसका निर्माण सरकारी फाइलों से आगे नहीं सरक पाया।
लंबी जद्दोजहद के बाद 27 अक्तूबर 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बहु प्रतिक्षित स्टेडियम के लिए 1.83 करोड़ रुपये मंजूर करने की घोषणा की। इस बार स्टेडियम का काम तो शुरू हुआ, लेकिन तत्कालीन विधायक राकेश पठानिया ने इसे एथलेटिक ट्रैक बताते हुए निर्माण पर ब्रेक लगवा दी। लिहाजा इसे क्रिकेट स्टेडियम के तौर पर विकसित करने की कवायद शुरू हुई और आखिरकार मई 2011 में धूमल सरकार की कैबिनेट ने उक्त मैदान को एचपीसीए को लीज देने की मंजूरी प्रदान कर दी। इससे पहले कि खेल प्रेमियों की चौगान में क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण की मुराद पूरी होती, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद क्रिकेट स्टेडियम का सपना उस समय चकनाचूर हो गया, जब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस प्रस्तावित स्टेडियम की जमीन की लीज स्थगित करने का एलान कर दिया, लेकिन बीते चार साल में ढाक के तीन पात वाले हालात रहे और चुनावी साल में जनवरी 2017 में प्रदेश मंत्रिमंडल ने नूरपुर में क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के लिए एचपीसीए को दी गई लीज को निरस्त कर दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने नूरपुर में वजीर राम सिंह पठानिया के नाम से चौगान में मल्टीपर्पस स्टेडियम बनाने की घोषणा की, लेकिन स्टेडियम की लीज निरस्त करने का मसला आर्बिट्रशन में जाने से एक बार फिर स्टेडियम के निर्माण में अड़ंगा लग गया।
विज्ञापन
चार करोड़ की डीपीआर तैयार
लोनिवि नूरपुर मंडल के एक्सईएन इंद्र सिंह उत्तम ने बताया कि चौगान में प्रस्तावित वजीर राम सिंह पठानिया मल्टीपर्पज स्टेडियम की करीब 4 करोड़ लागत की डीपीआर तैयार की गई है। फिलहाल एचपीसीए की ओर से लीज का मसला आर्बिट्रेशन में ले जाने से टेंडर प्रक्रिया अटकी पड़ी है।
विज्ञापन
कब, क्या हुआ
- 16 फरवरी 1990 को पहली बार स्टेडियम का शिलान्यास।
- 13 अगस्त 1996 को दूसरी मर्तबा स्टेडियम का शिलान्यास।
- 27 अक्तूबर 2005 को स्टेडियम निर्माण को 1.83 करोड़ रुपये देने की घोषणा।
- 2007 में चुनाव से पहले चौगान में एथलेटिक ट्रैक का काम शुरू।
- 2008 में स्टीयर्ज और अन्य निर्माण को तोड़कर क्रिकेट स्टेडियम की प्रपोजल तैयार।
- 2011 में एचपीसीए को खेल मैदान लीज पर देने को कैबिनेट की मंजूरी।
- 05 मार्च 2013 को सीएम का एचपीसीए की लीज रद्द करने का एलान।
- 04 जनवरी 2017 को प्रदेश मंत्रिमंडल का स्टेडियम की लीज निरस्त करने का फैसला।
- 13 जनवरी 2017 को सीएम ने मल्टीपर्पज स्टेडियम बनाने की घोषणा की ।
बाक्स
पहले सेना के अधीन थी जमीन
नूरपुर में प्रस्तावित खेल स्टेडियम की जमीन पर पहले भारतीय सेना का कब्जा था, लेकिन 90 के दशक में तत्कालीन सांसद सत महाजन ने खेल प्रेमियों की मांग पर स्टेडियम निर्माण के लिए अपनी सांसद निधि से इसकी उचित कीमत चुकाकर जमीन को खेल विभाग के नाम करवाया। साथ ही स्टेडियम निर्माण के लिए 12.84 लाख रुपये की धनराशि भी मुहैया करवाई थी।