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शिक्षण संस्थानों में रैगिंग ना करें, ना करने दें
Updated Wed, 28 Jun 2017 10:43 PM IST
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। राजकीय महाविद्यालय ज्वालामुखी में बुधवार को विधिक साक्षरता प्राधिकरण के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि एडवोकेट अभिषेक पाधा ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में रैगिंग बड़ी कुरीति के रूप में उभरी है, जिसे कानून के माध्यम से रोका गया है। 2009 में रैगिंग के खिलाफ कानून बना और इसमें शिक्षण संस्थान के मुखिया की भी जिम्मेवारी सुनिश्चित की गई। कॉलेजों में प्रवेश के समय रैगिंग के विषय में छात्रों का और उनके अभिभावकों का हलफनामा भी लिया जाता है, ताकि छात्रों में जिम्मेदारी का बोध बना रहे। एडवोकेट पाधा ने कहा कि रैगिंग के दोषी पाए जाने वाले छात्र को रैगिंग विरोधी कानून 2009 के तहत 3 साल तक का कारावास या 50,000 तक का जुर्माना हो सकता है और रैगिंग की शिकायत मिलने पर कार्रवाई न करने पर शिक्षण संस्थान के मुखिया को भी जुर्माना या कारावास का प्रावधान है। उन्होंने छात्रों को मोटर वाहन दुर्घटना अधिनियम की भी जानकारी दी। पाधा ने कहा कि कोई नशीले पदार्थ बेचता है तो उसकी सूचना शिक्षण संस्थान के मुखिया या पुलिस को दें। इस अवसर पर कॉलेज की रैगिंग विरोधी समिति के सदस्य प्राध्यापक प्रवीण प्रकाश शर्मा और सचिन ठाकुर, ऋचा ठाकुर, ज्योति सूद, अनु ठाकुर, प्रीक्षित गोस्वामी, सौरभ राना, प्रियंक शर्मा, अर्जुन, संजय, लाली, साहिल सहित अन्य छात्र उपस्थित थे।
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