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हिमाचल में शिक्षकों की लगाम ऐसे कसेगी सरकार
रोहित नागपाल/शिमला।
Updated Fri, 27 Sep 2013 01:48 AM IST
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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे अब परीक्षाएं देंगे और परिणाम आएगा शिक्षकों का।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिक्षा की गिरती गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए परीक्षाओं का माड्यूल लागू करने के निर्देश महकमे को दिए थे।
पूरे देश में लागू शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के कारण अपर प्राइमरी यानी आठवीं तक किसी भी विद्यार्थी को फेल नहीं किया जा सकता, क्योंकि वार्षिक परीक्षाओं के बजाय अब सतत समग्र मूल्यांकन लागू है।
राज्य सरकार ने केंद्र से मसला उठाकर परीक्षाओं की मंजूरी मांगी थी, लेकिन ये नहीं मिली। इसके बाद अब नई प्रक्रिया बनाई गई है।
इसमें दूसरी से आठवीं कक्षाओं तक साल में तीन बार परीक्षाएं ली जाएंगी। इनमें से दो परीक्षाएं आंतरिक यानी इन्हें स्कूल लेंगे और तीसरी परीक्षा डाइट लेंगे। पहली परीक्षा सत्र शुरू होने के 3 महीने बाद, दूसरी 6 माह बाद और तीसरी परीक्षा साल के अंत में होगी।
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परीक्षाओं के रिजल्ट के आधार पर शिक्षकों का मूल्यांकन होगा। यानी परीक्षा में यदि बच्चा फेल हो गया तो उसे अगली कक्षा में जाने से तो नहीं रोका जाएगा, लेकिन उसे पढ़ाने वाले टीचर पर कार्रवाई होगी। राज्य में इस समय कुल 15052 अपर प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें 987489 छात्र-छात्राएं इस साल पढ़ रहे हैं।
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एसएसए करेगा रिजल्ट का मूल्यांकन
स्कूलों में होने वाली परीक्षाओं का रिजल्ट उपनिदेशकों के माध्यम से निदेशालय में आएगा। इसका मूल्यांकन राज्य स्तर पर सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए) के अधिकारी करेंगे। जो खामियां पाई जाएंगी, उन्हें देखते हुए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की नीति बनेगी। हर जिले और ब्लॉक की जरूरत के हिसाब से यह नीति होगी।