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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा: मरीजों को आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे छोड़ना स्वास्थ्य अधिकारों से खिलवाड़
Fri, 02 Jan 2026 10:26 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 02 Jan 2026 10:26 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिना विभागीय नियंत्रण वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ना उनके स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में नर्सों की आउटसोर्स पर बड़े पैमाने पर भर्तियों पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने सरकार को 5 जनवरी तक हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि भर्ती नियमों में नियमित और अनुबंध का प्रावधान होने के बावजूद आउटसोर्स पर पद क्यों भरे जा रहे हैं।
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कोर्ट ने पाया कि 31 जुलाई 2024 तक स्टाफ नर्सों के 750 पद खाली थे, लेकिन राज्य सरकार ने केवल 28 पद ही नियमित आधार पर भरने की प्रक्रिया शुरू की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब भर्ती नियमों में नियमित या अनुबंध आधार पर भर्ती का प्रावधान है, तो स्वीकृत पदों के विरुद्ध आउटसोर्स का सहारा क्यों लिया जा रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की है कि यह प्रथा शोषण पर आधारित है और लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। आउटसोर्स कर्मियों को नियमित की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। अदालत ने इसे मरीजों के अधिकारों का हनन और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन भी माना।
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अदालत ने कहा कि बिना विभागीय नियंत्रण वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे मरीजों को छोड़ना उनके स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। सरकारी नियंत्रण न होने के कारण इन कर्मचारियों के खिलाफ कोई प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती है।
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अब तक कितने आउटसोर्स कर्मचारी किए गए नियमित
पिछले एक साल में स्टाफ नर्सों के कितने नियमित पद भरे गए, क्या राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की कोई नीति है और क्या अब तक कोई कर्मचारी नियमित किया गया है, इस बारे में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या वित्त विभाग का 13 अक्तूबर 2022 का वह पत्र अभी भी प्रभावी है, जिसमें आउटसोर्स सेवाओं को जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने इन भर्तियों पर रोक लगा दी थी, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को आठ सप्ताह के भीतर निपटाने का आदेश दिया था।
पिछले एक साल में स्टाफ नर्सों के कितने नियमित पद भरे गए, क्या राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की कोई नीति है और क्या अब तक कोई कर्मचारी नियमित किया गया है, इस बारे में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह भी पूछा है कि क्या वित्त विभाग का 13 अक्तूबर 2022 का वह पत्र अभी भी प्रभावी है, जिसमें आउटसोर्स सेवाओं को जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। उल्लेखनीय है कि इससे पहले हाईकोर्ट ने इन भर्तियों पर रोक लगा दी थी, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को आठ सप्ताह के भीतर निपटाने का आदेश दिया था।