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HP High Court : 25 मेगावाट से कम क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस

Thu, 04 Sep 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 04 Sep 2025 02:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से जारी 14 सितंबर 2006 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 25 मेगावाट से कम क्षमता वाले रिवर वैली प्रोजेक्ट और जलविद्युत परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी की आवश्यक नहीं होती है। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं। 

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HP High Court Notice to state and central govt regarding hydropower projects with capacity less than 25 MW
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में नदियों पर बन रही जलविद्युत परियोजनाओं और उससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें प्रदेश सरकार की ओर से जारी 14 सितंबर 2006 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 25 मेगावाट से कम क्षमता वाले रिवर वैली प्रोजेक्ट और जलविद्युत परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी की आवश्यक नहीं होती है।

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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी।

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याचिका में किन्नौर के शोंगटोंग कड़छम में 402 मेगावाट के हाइड्रो प्रोजेक्ट से संबंधित 2007 के पत्र में बादल फटने और ग्लेशियर लेक आउट बर्स्ट फ्लड जैसे पर्यावरणीय जोखिम को ध्यान में रखने की बात कही गई है। याचिका में जोर दिया गया है कि बाढ़, भूकंप और भूस्खलन जैसे जोखिमों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मामले में पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि प्रदेश को पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सतलुज नदी पर भाखड़ा से लेकर जंगी थोपन तक कई परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें से 25 मेगावॉट से कम क्षमता वाले प्रोजेक्ट भी शामिल हैं, जैसे की कूट 24 मेगावाट और अहोणा 22.5 मेगावाट।

उन्होंने ब्यास बेसिन में हाइड्रो प्रोजेक्ट की स्थिति पर भी बात की, जिसमें 51 हाइड्रो प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इनमें से 18 प्रोजेक्ट 25 मेगावाट से कम क्षमता के हैं। इनमें से 282.090 मेगावाट के 22 प्रोजेक्ट चालू हो चुके हैं, 947 मेगावाट के पांच प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं और 4 अभी आवंटित किए जाने हैं। प्रस्तावित 24 प्रोजेक्टों में से केवल 4 प्रोजेक्ट 50 मेगावाट से अधिक क्षमता के हैं, जिन्हें पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता है। 2 प्रोजेक्ट की क्षमता 25 से 50 मेगावाट के बीच है। जबकि बाकी 18 प्रोजेक्ट 25 मेगावाट से कम है जिनके लिए पर्यावरण मंजूरी लागू नहीं है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इन परियोजनाओं की स्थापना और नदियों के दोहन की प्रक्रिया को पर्यावरणीय दृष्टिकोण से दोबारा जांचने की आवश्यकता है। इसी वजह से याचिका दायर की गई है।
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