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HP High Court: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पहली में दाखिला देने से इन्कार नहीं कर सकती सरकार
Wed, 16 Oct 2024 08:24 PM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 16 Oct 2024 08:24 PM IST
सार
हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजीव शकधर और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के मामले में फैसला सुनाया कि राज्य सरकार बिना तैयारी के छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला देने से इन्कार नहीं कर सकती है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार बिना तैयारी के छह वर्ष से कम आयु के बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला देने से इन्कार नहीं कर सकती है। मुख्य न्यायाधीश राजीव शकधर और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के मामले में यह फैसला सुनाया।
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खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 31 मार्च 2021 को जारी सूचना के तहत दिए सुझावों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को एक विशेष तरीके से लागू करने का कोई वैधानिक आदेश नहीं है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करना है। कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार कानून के दायरे में रहते हुए अपने नागरिकों के विविध हितों की देखभाल करने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी स्थिति में याचिकाकर्ता छात्रों को यूकेजी कक्षा दोहराने के लिए मजबूर करने से शिक्षा नीति का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
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बालवाटिका एक, बालवाटिका दो और बालवाटिका तीन के लिए पाठ्यक्रम अभी तक तैयार और प्रभावी नहीं किया गया है। प्रदेश सरकार ने प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए कोई प्रशिक्षित शिक्षक भी नियुक्त नहीं किया है। कोर्ट ने मामलों का निपटारा करते हुए कहा कि जो बच्चे 6 वर्ष से कम आयु के हैं और पहले ही प्री-स्कूल शैक्षिक पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं, उन्हें आनन फानन में पहली कक्षा में दाखिले से वंचित नहीं किया जा सकता।
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गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण मामले में सरकार ने हाईकोर्ट में रखा पक्ष
गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के मामले में हिमाचल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बुधवार को उच्च न्यायालय में लिखित रूप में अपना पक्ष रखा। अब उच्च न्यायालय इस जवाब का अध्ययन करेगा। अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि गगल हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के लिए जो जमीन जा रही है, उससे लगभग 1500 परिवार बेघर हो रहे हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने की। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के विरोध में प्रभावित होने वाले गांवों के बाशिंदों ने एक समिति गठित की है। यह समिति वर्तमान में उच्च न्यायालय में इस विस्तारीकरण के विरोध में खड़ी है।
दरअसल गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापना में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 21 (1) को प्रदेश सरकार ने मंजूरी प्रदान की है, जबकि अधिनियम की धारा 11 और धारा 19 की प्रक्रिया बीते माह पूरी हो चुकी है। अब रनवे को 3,110 मीटर करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। कांगड़ा हवाई अड्डा विस्तार के लिए 14 गांवों की भू-अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। उधर, गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण प्रभावित सामाजिक कल्याण समिति के अध्यक्ष रजनीश मोना का कहना है कि प्रदेश सरकार और एएआई ने बुधवार को न्यायालय में अपना जवाब प्रस्तुत किया है। अब उच्च न्यायालय में इस मामले में 30 अक्तूबर को बहस होगी।
गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के मामले में हिमाचल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बुधवार को उच्च न्यायालय में लिखित रूप में अपना पक्ष रखा। अब उच्च न्यायालय इस जवाब का अध्ययन करेगा। अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि गगल हवाई अड्डे के विस्तारीकरण के लिए जो जमीन जा रही है, उससे लगभग 1500 परिवार बेघर हो रहे हैं। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और रंजन शर्मा की खंडपीठ ने की। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के विरोध में प्रभावित होने वाले गांवों के बाशिंदों ने एक समिति गठित की है। यह समिति वर्तमान में उच्च न्यायालय में इस विस्तारीकरण के विरोध में खड़ी है।
दरअसल गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापना में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 21 (1) को प्रदेश सरकार ने मंजूरी प्रदान की है, जबकि अधिनियम की धारा 11 और धारा 19 की प्रक्रिया बीते माह पूरी हो चुकी है। अब रनवे को 3,110 मीटर करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। कांगड़ा हवाई अड्डा विस्तार के लिए 14 गांवों की भू-अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हो चुकी है। उधर, गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण प्रभावित सामाजिक कल्याण समिति के अध्यक्ष रजनीश मोना का कहना है कि प्रदेश सरकार और एएआई ने बुधवार को न्यायालय में अपना जवाब प्रस्तुत किया है। अब उच्च न्यायालय में इस मामले में 30 अक्तूबर को बहस होगी।