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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP High Court decision Several accused in cases related to electricity theft and corruption acquitted

HP High Court: बिजली चोरी में समझौते के बाद आपराधिक कार्यवाही जारी रखना दोहरे दंड के समान

Wed, 24 Dec 2025 04:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 24 Dec 2025 04:00 AM IST
सार

बिजली चोरी और भ्रष्टाचार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कई आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। जानें विस्तार से...

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HP High Court decision Several accused in cases related to electricity theft and corruption acquitted
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली चोरी और भ्रष्टाचार से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कई आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि बिजली बोर्ड ने संबंधित अधिनियम के तहत आरोपी से समझौता (कंपाउंडिंग) कर लिया है और जुर्माना वसूल लिया है, तो उसी अपराध के लिए फिर से मुकदमा चलाना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 और सीआरपीसी की धारा 300 के तहत दोहरे दंड के समान है।

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यह मामला साल 2011 का है, जब विजिलेंस विभाग ने नाहन के कालाअंब इलाके में छापा मारा था। जांच में पाया गया कि आरोपी सतेंद्र मोहन ने हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड से कनेक्शन लेकर हरियाणा की सीमा में स्थित अपने ईंट-भट्ठे के लिए भूमिगत केबल बिछाई थी। पुलिस ने इस मामले में बिजली बोर्ड के अधिकारियों और एक ठेकेदार को भी आरोपी बनाया था। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120-बी(साजिश), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत केस दर्ज था और बिजली अधिनियम की धारा 135 (बिजली चोरी) के तहत मामला दर्ज किया गया।

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न्यायाधीश विरेंद्र सिंह की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि मुख्य आरोपी सतेंद्र मोहन ने पहले ही बिजली बोर्ड के साथ मामला सुलझा लिया था और 86,196 का जुर्माना बतौर पेनल्टी जमा कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी ने बिजली अधिनियम की धारा 152 के तहत अपराध को कंपाउंड कर दिया है, तो पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट का आधार ही खत्म हो जाता है। कोर्ट ने जेई और एसडीओ जैसे अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को भी खारिज कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया।

आरोपी ठेकेदार को भी राहत मिली, जिन्होंने केवल टेस्ट रिपोर्ट दी थी। कोर्ट ने माना कि बिजली कनेक्शन जारी करना बोर्ड के अधिकारियों का काम था, न कि ठेकेदार का। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (स्पेशल जज, नाहन) द्वारा आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने सतेंद्र मोहन, सुरेंद्र कुमार सैनी और सुशील कुमार गोयल सहित कई अन्य को सभी आरोपों से डिस्चार्ज करने का आदेश दिया। इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा कुछ अन्य आरोपियों को छोड़ देने के खिलाफ दायर की गई पुनरीक्षण याचिका को भी खारिज कर दिया।

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