Himachal: राज्य सरकार का बड़ा फैसला, 8,500 मेधावियों को कूपन की जगह 16-16 हजार रुपये मिलेंगे
सरकार ने अब 8,500 विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कूपन या ई-वाउचर देने की जगह उनके बैंक खातों में सीधे 16 हजार रुपये हस्तांतरित करने का फैसला लिया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार की मेधावी विद्यार्थियों के लिए संचालित टैबलेट-लैपटॉप योजना में बदलाव हो गया है। सरकार ने अब 8,500 विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कूपन या ई-वाउचर देने की जगह उनके बैंक खातों में सीधे 16 हजार रुपये हस्तांतरित करने का फैसला लिया है। शुक्रवार को शिक्षा सचिव राकेश कंवर की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। दसवीं, बारहवीं कक्षा और कॉलेज स्तर के करीब 9,500 मेधावी विद्यार्थियों को सरकार की ओर से डिजिटल उपकरण उपलब्ध करवाने की घोषणा की गई है। इसके लिए चयनित कंपनियों के माध्यम से लैपटॉप और टैबलेट उपलब्ध करवाने की व्यवस्था बनाई गई थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने पुरानी दरों पर उपकरण देने में असमर्थता जता दी है।
डीबीटी से पैसा जारी करने का फैसला
इसके चलते पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। मार्च 2026 में सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों के लिए 16 हजार रुपये के ई-वाउचर जारी किए थे और विद्यार्थियों ने उपकरणों की बुकिंग भी करवा दी थी। करीब 500 मेधावियों ने कूपन के माध्यम से उपकरणों की खरीद कर ली है। इस बीच रिडीम कार्ड निष्क्रिय हो गए, जिससे विद्यार्थी वाउचर राशि का उपयोग नहीं कर सके। स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सीधे लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) मॉडल अपनाने का फैसला लिया है। इसके तहत अभी सभी मेधावियों के आधार कार्ड से लिंक बैंक खातों का ब्योरा एकत्र किया जाएगा और आरटीजीएस के माध्यम से राशि जारी की जाएगी। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बताया कि मेधावियों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए सभी संभावनाओं पर विचार करने के बाद डीबीटी से पैसा जारी करने का फैसला लिया गया है।
हजारों मेधावियों पर भारी पड़ा पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध
हिमाचल प्रदेश के हजारों मेधावी विद्यार्थियों पर पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध भारी पड़ा है। पश्चिम एशिया में हुए युद्ध के चलते इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम बहुत अधिक बढ़ गए। युद्ध के चलते वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई, जिससे लैपटॉप और टैबलेट के दाम बढ़ गए। पोर्टल पर चयनित कंपनियों ने भी महंगे उपकरणों और बढ़ी हुई रैम-स्टोरेज लागत का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए। कांग्रेस सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने पर दिसंबर 2025 में मंडी से इस योजना की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों को रियायती दर पर लैपटॉप या टैबलेट उपलब्ध कराना था। वर्ष 2023, 2024 और 2025 के मेधावियों को उपकरणों की खरीद के लिए अब पैसा जारी किया जाएगा।