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Himachal: ‘भर्ती और सेवा की शर्तें’ विधेयक पर कर्मचारी संगठन भड़के, बोले- लागू करने से पहले वार्ता करे सरकार

Sat, 21 Dec 2024 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 21 Dec 2024 05:00 AM IST
सार

‘सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें विधेयक 2024’ को लेकर कर्मचारी भड़क गए हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस विधेयक को लाने की आवश्यकता ही नहीं थी।

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HP Employee organizations On Recruitment and Service Conditions Bill know demand
काले बिल्ले लगाकर किया विधेयक का विरोध करते हुए कोटशेरा कॉलेज के अध्यापक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

प्रदेश सरकार की ओर से विधानसभा में पारित ‘सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें विधेयक 2024’ को लेकर कर्मचारी भड़क गए हैं। कर्मचारियों ने इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस विधेयक को लाने की आवश्यकता ही नहीं थी। विधेयक में कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। विधेयक में ऐसा प्रावधान न हो जिससे कर्मचारियों की सेवा और सुरक्षा को नुकसान न पहुंचे। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने कहा कि विधेयक को लागू करने से पहले सरकार महासंघ के वार्ता करे। इसमें कर्मचारियों की सुझाव को भी शामिल किया जाना चाहिए।

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संयुक्त कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, महासचिव हीरालाल वर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार, वनिता सकलानी, सुनील जर्याल, उपाध्यक्ष डॉ सुरेंद्र डोकरा, मानसिंह ठाकुर, विमल शेखरी, एलडी चौहान, गीता राम, वीरेंद्र जिंटू, दिनेश शर्मा, गगन कपूर, डॉ. नितिन व्यास, आशा कुमार, बलदेव ठाकुर, यशवंत कंवर, डिप्टी जनरल सेक्रेटरी तिलक नायक, प्रकाश बादल, अरविंद मेहता, संयुक्त सचिव संतोष कुमार, अनिल कुमार, ताराचंद, हरि सिंह चौधरी, राजेश शर्मा, हेमचंद शर्मा, वित्त सचिव खमेंद्र गुप्ता, मुख्य संगठन सचिव कामेश्वर शर्मा, मुख्य सलाहकार नरेश कुमार शर्मा, ऑडिटर रविंद्र कंवर, प्रेस सचिव भूपेश शर्मा, पैटर्न गोविंद चित्रांटा, कुलदीप खरवाड़ा, रोशन लाल कपूर, अरुण गुलेरिया, राजेंद्र ठाकुर आदि महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि विधेयक को लाने की ही आवश्यकता नहीं थी। यदि लाया ही गया है तो इसमें ऐसे प्रावधान होने चाहिए थे जिससे कर्मचारियों के हितों कि रक्षा की जा सके, न कि इसके विपरीत हो।
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महासंघ ने की कि सरकार को इसे पुनः जांचना चाहिए। भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने, सभी भर्तियां लोक सेवा आयोग ओर सलेक्शन बोर्ड के माध्यम से हो, अनुबंध प्रणाली और अस्थायी नौकरियों के प्रावधान को खत्म किया जाए। कर्मचारियों के लिए बेहतर सुविधाएं, जैसे प्रोमोशन, ट्रांसफर नीति और रिटायरमेंट लाभ में सुधार की आवश्यकता है।

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सरकारी कॉलेज शिक्षकों ने काले बिल्ले लगाकर किया विधेयक का विरोध
हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (एचजीसीटीए) के आह्वान पर शुक्रवार को प्रदेशभर के 141 कॉलेजों में सेवारत शिक्षकों ने हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी नियुक्ति तथा सेवा शर्तें विधेयक-2024 का विरोध किया। शिक्षकों ने हर इकाई स्तर पर काले बिल्ले लगाकर गेट मीटिंग की और बिल को कर्मचारी विरोधी करार दिया।

एचजीसीटीए के प्रदेश महासचिव डॉ. संजय कानूनगो ने हमीरपुर कॉलेज में इकाई स्तर के विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि अनुबंध आधार पर नियुक्त कॉलेज प्रवक्ताओं ने 2009 से लंबी लड़ाई लड़कर माननीय उच्च न्यायालय से न्याय प्राप्त किया। माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में कर्मचारियों को वरिष्ठता सहित सभी लाभ प्रथम नियुक्ति से देने के फैसले दिए। कुछ प्रवक्ताओं को यह लाभ मिल भी चुके हैं, बहुत से कॉलेज शिक्षकों को यह लाभ नहीं मिले हैं। प्रदेश सरकार इसी बीच कर्मचारी विरोधी बिल लेकर आई। इसके अनुसार कर्मचारियों को अनुबंध कॉल को मिलाकर यह लाभ नियुक्ति तिथि से न देना पड़े इसके लिए माननीय न्यायालय के फैसले को दरकिनार किया गया।

उन्होंने कहा कि जब प्रदेश सरकार ने पुरानी पेंशन स्कीम लागू की थी, तो कॉलेज प्राध्यापक संघ ने इसका स्वागत किया था और लगा था कि यह सरकार कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखेगी, लेकिन उसके बाद प्रदेश सरकार एक से एक बढ़कर एक कर्मचारी विरोधी फैसले ले रही है। यह बिल कर्मचारी विरोधी होने का प्रमाण है। इसके अलावा स्टडी लीव पर जाने वाले प्रवक्ताओं को केवल 40 फीसदी वेतन तथा पीरियड आधार पर गेस्ट फैकेल्टी रखना आदि फैसले लिए गए हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (एचजीसीटीए) की ओर से सरकार से इस बिल को वापस लेने की मांग की। चेताया कि यदि बिल वापस न लिया गया तो कॉलेज प्राध्यापक संघ प्रदेश के अन्य कर्मचारी संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करने को मजबूर होगा।

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