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हिमाचल: पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता का छह माह का सेवा विस्तार रद्द, हाईकोर्ट ने पद छोड़ने का दिया आदेश

Wed, 28 Oct 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 28 Oct 2026 05:00 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रमुख अभियंता नरेंद्र पाल सिंह को दिए गए छह माह के सेवा विस्तार को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का आदेश दिया है। 

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Himachal: Six month service extension for PWD Engineer-in-Chief cancelled; High Court orders him to vacate the
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रमुख अभियंता नरेंद्र पाल सिंह को दिए गए छह माह के सेवा विस्तार को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पद छोड़ने का आदेश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को अप्रैल 2026 में रोकी गई स्क्रीनिंग चयन समिति की प्रक्रिया दोबारा शुरू कर 11 नवंबर या उससे पहले पूरी करने का आदेश दिया है। अदालत ने आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं, तो उन्हें 1 मई 2026 से पदोन्नति का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और सभी वित्तीय बकाया लाभ भी प्रदान किए जाएं।

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न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मुख्य अभियंता नरेंद्र पाल सिंह चौहान की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि किसी एक अधिकारी को सेवानिवृत्ति के बाद भी पद पर बनाए रखने से छह से सात योग्य अधिकारियों की पदोन्नति प्रभावित होती है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल असर पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी की कि सेवा विस्तार का प्रस्ताव नियमानुसार विभाग के निचले स्तर से आना चाहिए था, लेकिन इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर फाइल ऊपर से नीचे भेजी गई। यह प्रक्रिया मनमानी और नियमों के विपरीत थी। खंडपीठ ने कहा कि केवल जनहित शब्द लिख देने भर से कोई फैसला जनहित का नहीं हो जाता। रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य या दस्तावेज नहीं मिला, जिससे साबित हो कि सेवा विस्तार किन असाधारण परिस्थितियों में दिया गया।

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सरकार ने अपने ही आदेश की अनदेखी की: कोर्ट
सेवा विस्तार के पक्ष में सरकार ने दलील दी थी कि विभाग में इस पद के लिए कोई उपयुक्त उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था। हालांकि, याचिकाकर्ता समेत तीन अन्य मुख्य अभियंता पदोन्नति के लिए योग्य थे। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार ने सात अप्रैल 2026 को लिखित निर्देश जारी कर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवा विस्तार या पुनर्नियोजन नहीं देने का फैसला लिया था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी को विस्तार दिया गया। हाईकोर्ट ने पुराने फैसलों और हैंडबुक ऑफ पर्सनेल मैटर्स का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सेवा विस्तार केवल अत्यंत दुर्लभ और असाधारण परिस्थितियों में जनहित को ध्यान में रखकर दिया जा सकता है, न कि राजनीतिक या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर।

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