हिमाचल प्रदेश: हजारों किमी दूर से आए परिदों से रेणुका घाटी गुलजार, पक्षियों की इन प्रजातियों का हुआ आगमन
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में रेणुका घाटी इन दिनों विदेशी परिंदों से गुलजार होने लगी है। दिसंबर माह के अंतिम व जनवरी माह के प्रथम सप्ताह तक इन पक्षियों की संख्या में और अधिक इजाफा होने की संभावना है। पढ़ें पूरी खबर...
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मौसम में आए परिवर्तन के साथ ही रेणुका घाटी इन दिनों विदेशी परिंदों से गुलजार होने लगी है। इसे लेकर पक्षी प्रेमी भी खासे उत्साहित हैं। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर माह के प्रथम सप्ताह में छह प्रजातियों के 336 परिंदों ने ही रेणुका वेटलैंड में अपना डेरा जमाया है। दिसंबर माह के अंतिम व जनवरी माह के प्रथम सप्ताह तक इन पक्षियों की संख्या में और अधिक इजाफा होने की संभावना है।
बीते वर्ष दिसंबर माह में इन पक्षियों की संख्या 200 के करीब रही जो कि इस बार बढ़कर 300 का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिलहाल किसी नई प्रजाति का इस्तकबाल नहीं हुआ है। बर्फबारी के बाद कुछेक नई प्रजातियों के आने की भी उम्मीद है। प्रतिवर्ष हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय करके यह पक्षी आकाश मार्ग से समूहों में यहां पहुंचते हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार छह प्रजातियों के 336 प्रवासी पक्षी रेणुकाजी वेटलैंड पहुंच चुके हैं। यह पक्षी रेणुका झील के अंतिम छोर पर बने विशेष टापुओं पर अपनी अठखेलियां व जल क्रीड़ा करते दिखाई दे रहे हैं। रेणुका वेटलैंड का शांत वातावरण इन परिंदों को बहुत भाता है। यहां इन्हें किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है और यहां भोजन भी इन्हें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। इस कारण प्रति वर्ष प्रवासी परिंदों की कई प्रजातियां यहां सर्दियों के दौरान दस्तक देतीं हैं। साथ लगते जटोन बैराज में भी यह प्रवासी पक्षियों को जल क्रीड़ाएं करते दिखाई दिए हैं।
रेणुका पहुंची इन विदेशी परिंदों की प्रजातियों में मोरहन-193, ग्रेट कार्मोरेंट-2, लिटल कार्मोरेंट-7, मैलाड -37, ग्रेट ईगरिट-2 व कोम कूटस-95 शामिल हैं। इन प्रजातियों ने रेणुकाजी में अपना आशियाना बनाया है। इनमें सर्वाधिक संख्या मोरहन की है जोकि सबसे पहले यहां पहुंच कर अन्य प्रजातियों को मेहमान नवाजी का संकेत देते हैं।
रेणुका घाटी में पक्षी साइबेरिया, इटली, चीन, रूस, कुवैत, सउदी अरब, अफगानिस्तान व ब्राजील आदि स्थानों से यहां आते हैं। ये करीब तीन माह का समय यहां बीतने के बाद फरवरी माह के अंतिम सप्ताह तक लौट जाएंगे। - राकेश कुमार, कार्यवाहक आरएफओ, वन्य प्राणी विहार रेणुकाजी।