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Himachal Pradesh: हिमाचल के इन चार शहरों की भार वहन क्षमता का होगा अध्ययन, प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
Fri, 28 Feb 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Fri, 28 Feb 2025 05:00 AM IST
सार
हिमाचल में चार प्रमुख पर्यटन स्थलों शिमला, मनाली, धर्मशाला और कसौली की भार वहन क्षमता (लोड कैरिंग कैपेसिटी) का अध्ययन किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Meta
विस्तार
प्रदेश के चार प्रमुख पर्यटन स्थलों की भार वहन क्षमता (लोड कैरिंग कैपेसिटी) का अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए शिमला, मनाली, धर्मशाला और कसौली का चयन किया गया है। प्रदेश के इन शहरों में सालभर देश और विदेश से पर्यटक आते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए भारी नुकसान के बाद पर्यावरणविद भार वहन क्षमता के अध्ययन की मांग उठा रहे थे। अध्यनन से पता चल सकेगा कि इन शहरों में वर्तमान में कितना बोझ है और ये कितना भार वहन कर सकते हैं। प्रत्येक शहर की रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके बाद इन शहरों में निर्माण और नियोजन के दृष्टिगत विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
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अगले चरण में प्रदेश के अन्य शहरों क भी भारवहन क्षमता का अध्ययन होगा। अध्ययन से शहरों में निर्माण और भूकंप के लिहाज से संवेदनशीलता की भी जानकारी मिलेगी। अध्ययन में जियोलाजिकल, जियोटेक्निकल, जियोफिजिकल जांच के अलावा ढलान स्थिरीकरण भी जांचा जाएगा। भार वहन क्षमता के अध्ययन से सरकार ने प्रदेश के शहरों को लेकर नीति में बदलाव के भी संकेत दिए हैं। राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों को इन शहरों के तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन का काम सौंपा जाएगा। अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर में निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा रिपोर्ट में भविष्य की जरूरतों का भी उल्लेख होगा जिससे सरकार आने वाले वर्षों की मांग के अनुरूप आधारभूत ढांचा विकसित कर सकेगी।
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यह होंगे अध्ययन के मुख्य बिंदू
शहर की भार वहन क्षमता के अलावा हर साल आने वाले पर्यटकों की संख्या और शहर में सालाना आने वाले आगंतुकों की सही संख्या का अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन का एक अन्य पहलू मौजूदा जल निकासी प्रणाली और इसे और कैसे विकसित किया जा सकता है, भी होगा। अध्ययन का तीसरा प्रमुख बिंदु ढलान (झुकाव) की डिग्री का पता लगाना होगा, जिस पर घर बनाए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर सरकार आने वाले समय में पहाड़ों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या का निर्धारण भी कर सकती है।
6,000 लोगों के लिए बसाए शिमला शहर की आबादी आज 3.5 लाख
अंग्रेजों ने शिमला शहर बतौर ग्रीष्मकालीन राजधानी 6,000 लोगों के लिए बसाया था। आज शिमला की आबादी करीब 3.5 लाख (पर्यटक भी शामिल) है। ऐसे ही हालात मनाली, धर्मशाला और कसौली के भी हैं। क्षमता से अधिक सैलानियों के पहुंचने से इन पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट सीजन में यातायात, पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं पटरी से उतर जाती हैं। आने वाले सालों में स्थिति और अधिक भयावह न हो इसके लिए सरकार भारवहन क्षमता का अध्ययन कर भविष्य के लिए योजना बनाएगी।
शहर की भार वहन क्षमता के अलावा हर साल आने वाले पर्यटकों की संख्या और शहर में सालाना आने वाले आगंतुकों की सही संख्या का अध्ययन किया जाएगा। अध्ययन का एक अन्य पहलू मौजूदा जल निकासी प्रणाली और इसे और कैसे विकसित किया जा सकता है, भी होगा। अध्ययन का तीसरा प्रमुख बिंदु ढलान (झुकाव) की डिग्री का पता लगाना होगा, जिस पर घर बनाए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर सरकार आने वाले समय में पहाड़ों पर आने वाले पर्यटकों की संख्या का निर्धारण भी कर सकती है।
6,000 लोगों के लिए बसाए शिमला शहर की आबादी आज 3.5 लाख
अंग्रेजों ने शिमला शहर बतौर ग्रीष्मकालीन राजधानी 6,000 लोगों के लिए बसाया था। आज शिमला की आबादी करीब 3.5 लाख (पर्यटक भी शामिल) है। ऐसे ही हालात मनाली, धर्मशाला और कसौली के भी हैं। क्षमता से अधिक सैलानियों के पहुंचने से इन पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट सीजन में यातायात, पेयजल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं पटरी से उतर जाती हैं। आने वाले सालों में स्थिति और अधिक भयावह न हो इसके लिए सरकार भारवहन क्षमता का अध्ययन कर भविष्य के लिए योजना बनाएगी।