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Himachal Pradesh : प्राथमिक स्कूल झंडूता का भवन जर्जर, कार्यालय में लग रहीं कक्षाएं; जानें विस्तार से
Sun, 31 Aug 2025 11:18 AM IST
अंकेश डोगरा
मंगल ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, बरठीं (बिलासपुर)।
मंगल ठाकुर, संवाद न्यूज एजेंसी, बरठीं (बिलासपुर)।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:18 AM IST
सार
राजकीय प्राथमिक पाठशाला झंडूता में 105 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन कक्षाएं केंद्रीय मुख्य शिक्षक के कार्यालय और बीआरसी कार्यालय के बरामदे में लग रही हैं।
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प्राथमिक स्कूल झंडूता का जर्जर भवन।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
राजकीय प्राथमिक पाठशाला झंडूता की कक्षाएं केंद्रीय मुख्य शिक्षक के कार्यालय और बीआरसी कार्यालय के बरामदे में लग रही हैं। इस स्कूल में 105 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। झंडूता शिक्षा खंड में बच्चों की यह संख्या किसी प्राथमिक स्कूल में सबसे अधिक है, लेकिन कमरों के अभाव में बच्चे और स्टाफ को परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। इस स्कूल के मुख्य भवन के छत पांच साल पहले तूफान में उड़ गई थी। उसके बाद स्कूल को पास में ही बने दो कमरों में स्थानांतरित किया गया, लेकिन वह कमरे में भी अब जर्जर हो चुके हैं। केंद्रीय मुख्य शिक्षक अपने कार्यालय में बच्चों को बैठाकर पढ़ाई करवा रही हैं।
कुछ कक्षाएं पास ही स्थित बीआरसी कार्यालय के बरामदे में लग रही हैं। स्कूल का पुराना भवन खंडहर बन चुका है। वह कभी गिर सकता है। स्कूल प्रबंधन की ओर से पुराने भवन को गिराने और नया बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उनको डर सता रहा है की कच्ची दीवार होने के कारण यह कभी भी हादसे को निमंत्रण दे सकती है। बच्चे वहां खेलते रहते हैं, जिस कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। सरकार और प्रशासन की बेरुखी का खामियाजा कहीं बच्चों को न भुगतना पड़े। अभिभावक भी रोज चिंतित हो रहे है। बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा अब उनकी सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है।
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कुछ कक्षाएं पास ही स्थित बीआरसी कार्यालय के बरामदे में लग रही हैं। स्कूल का पुराना भवन खंडहर बन चुका है। वह कभी गिर सकता है। स्कूल प्रबंधन की ओर से पुराने भवन को गिराने और नया बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उनको डर सता रहा है की कच्ची दीवार होने के कारण यह कभी भी हादसे को निमंत्रण दे सकती है। बच्चे वहां खेलते रहते हैं, जिस कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। सरकार और प्रशासन की बेरुखी का खामियाजा कहीं बच्चों को न भुगतना पड़े। अभिभावक भी रोज चिंतित हो रहे है। बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा अब उनकी सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है।
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मरम्मत के लिए सरकार को भेजा प्रस्ताव
केंद्रीय मुख्य शिक्षक सावित्री देवी ने बताया कि नया भवन बनाने और पुराने भवन को गिराने के लिए कई बार प्रशासन और सरकार के साथ पत्राचार किया है, लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। विकास खंड शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल शर्मा ने बताया की स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं आई है। स्वीकृति आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
लढ़यानी प्राथमिक स्कूल परिसर तालाब में तब्दील
उप तहसील भराड़ी के तहत राजकीय प्राथमिक पाठशाला लढ़यानी में इन दिनों भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। लगातार हो रही बरसात से विद्यालय परिसर तालाब का रूप ले चुका है। पानी का तेज बहाव सीधे स्कूल भवन की ओर आता है, जिससे वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल बारिश के मौसम में सामने आती है। विद्यालय भवन भी पानी की मार झेल रहा है, दीवारों में नमी और दरारें पड़ चुकी हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने विभाग से बार-बार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों को पढ़ाई का हक देता है, वहीं दूसरी ओर ऐसी परिस्थितियां उनकी जान पर भारी पड़ सकती हैं।
केंद्रीय मुख्य शिक्षक सावित्री देवी ने बताया कि नया भवन बनाने और पुराने भवन को गिराने के लिए कई बार प्रशासन और सरकार के साथ पत्राचार किया है, लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। विकास खंड शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल शर्मा ने बताया की स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं आई है। स्वीकृति आने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
लढ़यानी प्राथमिक स्कूल परिसर तालाब में तब्दील
उप तहसील भराड़ी के तहत राजकीय प्राथमिक पाठशाला लढ़यानी में इन दिनों भारी बारिश से हालात बिगड़ गए हैं। लगातार हो रही बरसात से विद्यालय परिसर तालाब का रूप ले चुका है। पानी का तेज बहाव सीधे स्कूल भवन की ओर आता है, जिससे वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या हर साल बारिश के मौसम में सामने आती है। विद्यालय भवन भी पानी की मार झेल रहा है, दीवारों में नमी और दरारें पड़ चुकी हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने विभाग से बार-बार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाया है। अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों को पढ़ाई का हक देता है, वहीं दूसरी ओर ऐसी परिस्थितियां उनकी जान पर भारी पड़ सकती हैं।