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HP High Court: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- बेसहारा पशुओं को टैग करने के लिए उचित कदम उठाएं
Tue, 11 Nov 2025 03:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Tue, 11 Nov 2025 03:00 AM IST
सार
बेसहारा पशुओं को टैग लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। हिमाचल प्रदेश ने ये निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। वहीं, अदालत ने सभी गो अभयारण्यों में पहले से रखे मवेशियों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि बेसहारा पशुओं को टैग लगाने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस संबंध में राज्य सरकार को हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने सभी गो अभयारण्यों में पहले से रखे मवेशियों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
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अदालत ने यह निर्देश याचिकाकर्ता की ओर से दिए सुझावों पर विचार करने के बाद दिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि बेसहारा पशुओं की समस्या को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए सबसे पहले जिला स्तर पर जनगणना करवाई जानी चाहिए। इससे राज्य को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ठोस योजना बनाने में मदद मिलेगी।
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राज्य के पशुपालन सचिव ने 31 जुलाई 2025 के आदेश के अनुपालन में एक हलफनामा दायर किया है। इसमें बताया गया है कि राज्य के गो अभयारण्यों और गोसदनों में अब तक 21,306 मवेशियों का पुनर्वास किया जा चुका है। वर्तमान में प्रदेश में 15 गो अभयारण्य कार्यरत हैं और सात निर्माणाधीन हैं। लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में इस दिशा में निवेश नहीं किया गया है, क्योंकि यहां लावारिस पशुओं का खतरा नगण्य है।
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गैर-सरकारी क्षेत्र में दो गोसदन कार्यरत हैं। जिला कांगड़ा के लुथान में राधे कृष्ण गो अभयारण्य में आठ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और तूड़ी स्टोर का निर्माण कार्य 65 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस अभयारण्य का रखरखाव ज्वालामुखी मंदिर ट्रस्ट करेगा। नादौन गोसदन पालमपुर में 50 पशुओं की क्षमता के मुकाबले 55 पशु रखे गए हैं, जबकि पितृतर्पण गोसदन में 30 की क्षमता के स्थान पर 35 पशु रखे गए हैं।
कुंदन गो अभयारण्य (उप-तहसील चचियां) को मार्च 2025 में पशुपालन विभाग से देवभूमि गो रक्षा फाउंडेशन को सौंपा गया था। इसके संचालन के लिए उपायुक्त कांगड़ा की ओर से आधिकारिक और गैर-आधिकारिक सदस्यों की एक समिति गठित की गई है।
कुंदन गो अभयारण्य (उप-तहसील चचियां) को मार्च 2025 में पशुपालन विभाग से देवभूमि गो रक्षा फाउंडेशन को सौंपा गया था। इसके संचालन के लिए उपायुक्त कांगड़ा की ओर से आधिकारिक और गैर-आधिकारिक सदस्यों की एक समिति गठित की गई है।