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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal Pradesh High Court said examination year will be important in batch based appointment

HP High Court : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- बैच आधार नियुक्ति में परीक्षा वर्ष होगा महत्वपूर्ण, जानें

Tue, 23 Sep 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 23 Sep 2025 05:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति के लिए उम्मीदवार के प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख नहीं, बल्कि परीक्षा का वर्ष महत्वपूर्ण माना जाएगा। जानें पूरा मामला...

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Himachal Pradesh High Court said examination year will be important in batch based appointment
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बैच आधार पर चयन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के लिए उम्मीदवार के प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख नहीं, बल्कि परीक्षा का वर्ष महत्वपूर्ण माना जाएगा। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारी के पद पर वर्ष 2005 बैच के तहत नियुक्ति देने का आदेश दिया है, जबकि उसका डिप्लोमा प्रमाणपत्र अप्रैल 2006 में जारी हुआ था।

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हाईकोर्ट ने भर्ती और पदोन्नति नियमों के प्रावधानों की जांच करते हुए पाया कि बैच की गणना के लिए संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थान की ओर से उम्मीदवार की अंतिम व्यावसायिक परीक्षा के डिटेल मार्क्स सर्टिफिकेट पर दर्ज तारीख को प्रासंगिक माना जाएगा। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पिछली अवधि के लिए मौद्रिक लाभों की हकदार नहीं होगी, लेकिन उसकी नियुक्ति की तारीख वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभों के लिए गिनी जाएगी। न्यायालय ने पाया कि भले ही प्रमाणपत्र 7 अप्रैल 2006 को जारी किया गया हो, लेकिन प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि परीक्षा आयुर्वेदिक फार्मेसी द्वितीय वर्ष 2004-2005 से संबंधित थी, अन्य दस्तावेजों जैसे ट्रेनिंग सर्टिफिकेट से यह भी स्पष्ट हुआ है कि याचिकाकर्ता ने अंतिम ट्रेड टेस्ट जून 2005 में पास कर लिया था। 

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न्यायालय ने कहा कि नियमों में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख ही बैच की गणना के लिए प्रासंगिक होगी, बल्कि पास होने का वर्ष और महीना ही मायने रखेगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी पाया कि इस मामले में प्रभावित चौथे प्रतिवादी की कोई गलती नहीं थी, जिसे पहले नियुक्त किया गया था और अपने पद पर बरकरार रखा है।

अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने शैक्षणिक सत्र 2003-2005 में अपना आयुर्वेदिक फार्मेसी में डिप्लोमा पूरा किया और अंतिम परीक्षा जून 2005 में दी थी। हालांकि, उसका डिटेल मार्क्स सर्टिफिकेट 7 अप्रैल 2006 को जारी हुआ। जब आयुर्वेदिक फार्मेसी अधिकारी के पद पर बैचवाइज चयन हो रहा था, तो स्क्रीनिंग कमेटी ने प्रमाणपत्र जारी होने की तारीख को आधार बनाते हुए उसे 2006 बैच का उम्मीदवार मान लिया और 2005 बैच के तहत उसकी नियुक्ति अस्वीकार कर दी। याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए कहा कि उसका डिप्लोमा शैक्षणिक सत्र 2004-2005 का था और उसने परीक्षा जून 2005 में पास कर ली थी। न्यायालय ने पाया कि भले ही प्रमाणपत्र 7 अप्रैल 2006 को जारी किया गया हो, लेकिन प्रमाण पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि परीक्षा आयुर्वेदिक फार्मेसी द्वितीय वर्ष 2004-2005 से संबंधित थी।

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