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Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज की कर्मचारी की जन्म तिथि में बदलाव की अपील, जानें पूरा मामला
Wed, 20 Aug 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 20 Aug 2025 05:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एकलपीठ के 19 नवंबर 2024 के फैसले को बरकरार रखा है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवा रिकॉर्ड में जन्म तिथि सुधार की मांग करने वाली एक कर्मचारी की अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने एकलपीठ के 19 नवंबर 2024 के फैसले को बरकरार रखा है। खंडपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवा के अंतिम चरण में जन्म तिथि में बदलाव का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियम 1971 के नियम 7.1 का हवाला दिया, जिसमें सेवा में प्रवेश के 2 साल के भीतर जन्मतिथि सुधार के लिए अनुरोध करने का प्रावधान है।
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खंडपीठ ने कहा कि जब याचिकाकर्ता ने खुद 2014 में अपनी जन्म तिथि का पता लगने की बात स्वीकार की है, तो वह अब 2002 में आवेदन करने की बात पर जोर नहीं दे सकती। न्यायालय ने पाया कि दीवानी मुकदमे में याचिकाकर्ता के नियुक्ता को पक्षकार नहीं बनाया गया था जो उनके दावे को कमजोर करता है। याचिकाकर्ता ने जल शक्ति विभाग में 25 अप्रैल 2000 को जूनियर इंजीनियर के रूप में अपनी सेवाएं शुरू की। उनके सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि 6 जनवरी 1969 दर्ज थी, जिसे वे 21 अक्तूबर 1969 में संशोधन करना चाहती थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने अपनी सेवा के 2 साल के भीतर यानी 2002 में ही अपनी जन्मतिथि में सुधार के लिए आवेदन किया था। लेकिन विभाग ने उसे आवेदन के रिकॉर्ड को अज्ञात बताकर खारिज कर दिया।
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विभाग के विभाग की ओर से आवेदन को खारिज करने के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत का रुख किया, लेकिन एक जज की पीठ ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने एक जज के फैसले के खिलाफ अपील दायर की। हालांकि मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने पाया कि 2015 में डायरेक्ट दीवानी मुकदमे में याचिकाकर्ता ने खुद यह स्वीकार किया था कि उन्हें अपनी सही जन्मतिथि के बारे में 15 नवंबर 2014 को ही पता चला था जब उन्होंने ग्राम पंचायत में अपना जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया। इन आधारों पर अदालत ने याचिकाकर्ता सत्या की अपील को खारिज कर दिया।