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Himachal News: थर्मल फ्लूइड हीटर का पेटेंट मंजूर, कम करेगा बिजली की खपत, छह वैज्ञानिकों ने किया अहम अविष्कार

Sat, 15 Nov 2025 01:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 15 Nov 2025 01:00 AM IST
सार

थर्मल फ्लूइड हीटर के आविष्कार को भारतीय पेटेंट कार्यालय से मंजूरी मिल गई है। ये आविष्कार हिमाचल के छह वैज्ञानिकों ने किया है। जानें इसकी क्या है खासियतें...

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Himachal Patent for thermal fluid heater approved will reduce electricity consumption
थर्मल फ्लयूड हीटर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

नैनो तकनीक पर हिमाचल प्रदेश के छह वैज्ञानिकों ने थर्मल फ्लूइड हीटर का आविष्कार किया है। इस आविष्कार को भारतीय पेटेंट कार्यालय से मंजूरी मिल गई है। इस हीटर की यह खासियत है कि यह बेहद कम कार्बन उत्सर्जन करेगा और कम ऊर्जा की खपत करेगा। पारंपरिक बॉयलरों की तुलना में यह अधिक सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और कम खर्चीला है।

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शोध टीम में छह प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. पुष्पलता शर्मा सह आचार्य गणित विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला, डॉ. अजित कुमार, सहायक आचार्य गणित, सांयकालीन महाविद्यालय शिमला, डॉ. ज्ञान चंद राणा प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय धनेटा, डॉ. धनंजय यादव सहआचार्य गणित निजवा विश्वविद्यालय ओमान, डॉ. पंकज कुमार सहायक आचार्य केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला और डॉ. पंकज ठाकुर आचार्य इक्फाई विश्वविद्यालय सोलन शामिल हैं।

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वैज्ञानिकों को भारतीय पेटेंट कार्यालय से डिजाइन नंबर 464670-001, क्लास 23-03 में दर्ज हुआ है। शोध टीम ने बताया कि थर्मल द्रव हीटर एक आधुनिक, ऊर्जा-दक्ष और सुरक्षित हीटिंग डिवाइस है, जो तरल पदार्थों को नियंत्रित और समान तापमान पर गर्म करने में सक्षम है। नैनो फ्लूइड तकनीक पर विकसित इस डिवाइस का उपयोग दवाओं, सैनिटाइजर और मेडिकल फ्लूइड को सुरक्षित तापमान पर रखने में मदद करता है और अस्पतालों में स्टरलाइजेशन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाता है।

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इसके अलावा यह उपकरण दूध, पेय पदार्थ और खाद्य सामग्री को गर्म करने में सक्षम है, जिससे खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को नई मजबूती मिलती है। यह छोटे उद्योगों, डेयरी यूनिट और एमएसएमई क्षेत्रों के लिए किफायती और टिकाऊ विकल्प सिद्ध हो सकता है। दूरदराज और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में इसकी स्थापना सरल है, जिससे राहत शिविरों, मेडिकल कैंपों और फील्ड-ऑपरेशन में इसे तेज़ी से उपयोग में लाया जा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में उद्योग, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

यह उपलब्धि डॉ. पुष्पलता शर्मा के नेतृत्व में संभव हो सकी। यह हीटर नैनौ फ्लूइड का प्रयोग कर विकसित किया गया है, जो कि कम ऊर्जा की खपत करेगा और इसके प्रयोग से कार्बन उत्सर्जन कम होगा। टीम का लक्ष्य है कि यह नवाचार आम जनता तक पहुंचे और मानव जीवन को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और ऊर्जा-कुशल बनाए। -डॉ. ज्ञान चंद राणा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय धनेटा
 
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