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Himachal: अनुबंधित सीनियर रेजिडेंट, ट्यूटर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को संशोधित स्टाइपेंड देने का आदेश

Fri, 29 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 29 May 2026 05:00 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने अनुबंध पर तैनात सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को भी संशोधित स्टाइपेंड देने का आदेश दिया है।

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Himachal: Orders Issued to Provide Revised Stipend to Contractual Senior Residents and Tutor Specialists
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध पर तैनात सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को भी संशोधित स्टाइपेंड देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुबंध नीति और रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी के तहत नियुक्त चिकित्सकों के बीच केवल भर्ती के स्रोत के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार किसी पद के लिए स्टाइपेंड में संशोधन करती है, तो उसका लाभ समान कार्य व जिम्मेदारियां निभा रहे सभी डॉक्टरों को मिलना चाहिए। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से 10 अप्रैल 2025 को जारी अधिसूचना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि संशोधित स्टाइपेंड का लाभ अनुबंध पर कार्यरत डॉक्टरों को नहीं मिलेगा।

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 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध पर तैनात सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को भी संशोधित स्टाइपेंड देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुबंध नीति और रेजिडेंट डॉक्टर पॉलिसी के तहत नियुक्त चिकित्सकों के बीच केवल भर्ती के स्रोत के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार किसी पद के लिए स्टाइपेंड में संशोधन करती है, तो उसका लाभ समान कार्य व जिम्मेदारियां निभा रहे सभी डॉक्टरों को मिलना चाहिए। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से 10 अप्रैल 2025 को जारी अधिसूचना में कहीं भी यह उल्लेख नहीं था कि संशोधित स्टाइपेंड का लाभ अनुबंध पर कार्यरत डॉक्टरों को नहीं मिलेगा।

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10 अप्रैल से ही स्टाइपेंड का लाभ देने का आदेश

हाईकोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को 10 अप्रैल 2025 से ही एक लाख रुपये प्रतिमाह संशोधित स्टाइपेंड का भुगतान किया जाए। इस फैसले के बाद राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों में अनुबंध पर कार्यरत सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए भी बढ़े हुए स्टाइपेंड का रास्ता साफ हो गया है।

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यह है मामला

याचिकाकर्ताओं को 28 मई 2021 को लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक (मंडी) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में अनुबंध पर तीन साल के लिए सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट के रूप में नियुक्ति किया गया था। सरकार ने 10 अप्रैल 2025 को सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट का मासिक स्टाइपेंड 60 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रतिमाह कर दिया, लेकिन अनुबंध नीति के तहत नियुक्ति का हवाला देकर याचिकाकर्ताओं को इसका लाभ देने से इन्कार कर दिया गया। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता हाईकोर्ट चले गए।

अदालत के आदेश की अवहेलना पर सरकार को 10 हजार जुर्माना

 प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से अदालती आदेशों को लागू करने में बरती जा रही ढिलाई पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को फैसला लागू करने के लिए तीन सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने यह रियायत मुफ्त में नहीं दी, बल्कि अदालती आदेश की अवहेलना पर सरकार को 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि सरकार को मुख्य न्यायाधीश आपदा रिलीफ फंड में जमा करनी होगी। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे पहले 24 अप्रैल को हुई सुनवाई में भी सरकार को फैसला लागू करने का अंतिम अवसर दिया गया था। बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। यह मामला कॉलेज के सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसरों) की याचिकाओं से जुड़ा है, जिन्होंने कोर्ट से अनुबंध के आधार पर नियुक्ति की तारीख से ही समान काम के लिए समान वेतन का लाभ, अनुबंध अवधि को पेंशन, कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) और उच्च वेतनमान के लिए कुल सेवाकाल में गिनने की मांग की थी। अदालत ने केस के गुण दोष पर जाए बिना याचिकाओं का निपटारा करते हुए सरकार को निर्देश दिया कि चार सप्ताह के भीतर डॉ. रणजीत सिंह ठाकुर मामले के फैसले के तहत याचिकाकर्ताओं के दावों पर विचार कर आदेश पारित करे। यदि याचिकाकर्ता भी उसी श्रेणी के पाए जाते हैं, तो उन्हें अगले चार सप्ताह के भीतर सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।

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