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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Himachal: Order to grant family pension benefits to second wife following first wife's death; govt appeal dism

हिमाचल: पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी को फैमिली पेंशन का लाभ देने के आदेश, सरकार की अपील खारिज

Tue, 22 Sep 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 22 Sep 2026 05:00 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी पत्नी पेंशन की हकदार नहीं होती, परंतु पहली पत्नी के निधन के बाद और लंबे समय तक साथ रहने के आधार पर दूसरी पत्नी को वित्तीय संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। 

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Himachal: Order to grant family pension benefits to second wife following first wife's death; govt appeal dism
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी पत्नी पेंशन की हकदार नहीं होती, परंतु पहली पत्नी के निधन के बाद और लंबे समय तक साथ रहने के आधार पर दूसरी पत्नी को वित्तीय संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने पहली पत्नी के निधन के बाद दूसरी पत्नी को सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज कर फैमिली पेंशन का लाभ देने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया एवं न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि भले ही दूसरी शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य न हो लेकिन लंबे समय तक एक साथ रहना, सामाजिक न्याय और आर्थिक सशक्तिकरण के सिद्धांतों को भी ध्यान में रखना होगा।

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खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि फैमिली पेंशन का मुख्य उद्देश्य एक असहाय महिला को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उसे सामाजिक सुरक्षा व गरिमा प्रदान करना है। ऐसे मामलों में अदालतों को केवल रूढ़िवादी दृष्टिकोण अपनाने के बजाय सामाजिक संदर्भ निर्णय की नीति अपनानी चाहिए। हालांकि, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह अवैध माना जाता है, लेकिन इसे समाज में अनैतिक नहीं कहा जा सकता। कानून का उद्देश्य किसी महिला को बेसहारा या भूखा मरने से बचाना है।

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याचिकाकर्ता महेश राम 2003 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। याचिकाकर्ता की पहली पत्नी कमलेश देवी का निधन 20 अप्रैल 2020 को हो गया था। दोनों की कोई संतान नहीं थी। निसंतान होने के कारण याचिकाकर्ता ने पहली पत्नी की जीवित रहते ही उसकी बहन ज्वाला देवी से दूसरी शादी कर ली थी। विवाद तब शुरू हुआ जब पहली पत्नी कमलेश की मृत्यु के बाद याचिकाकर्ता ने पेंशन पेमेंट ऑर्डर (पीपीओ) और सर्विस रिकॉर्ड में अपनी दूसरी पत्नी का नाम दर्ज करने का अनुरोध किया। ।

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 राज्य सरकार और संबंधित विभाग ने इस अनुरोध को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5 और सीसीएस (पेंशन) नियम 1972 के तहत पहली पत्नी के जीवित रहते की गई दूसरी शादी कानूनी रूप से अमान्य है। इसके खिलाफ याचिकाकर्त ने हाईकोर्ट में वर्ष 2024 में रिट याचिका दायर की। एकल जज ने 17 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद सर्विस रिकॉर्ड में दूसरी पत्नी का नाम दर्ज किया जाए। इस फैसले से असंतुष्ट होकर हिमाचल प्रदेश सरकार ने खंडपीठ के समक्ष एलपीए दायर की, जिस पर खंडपीठ ने यह फैसला दिया है

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