Himachal News: छात्रवृत्ति घोटाले में आरोपी हितेश को नहीं मिली नियमित जमानत, अदालत ने आवेदन को किया खारिज
200 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में अदालत ने आरोपी हितेश गांधी को नियमित जमानत देने से इन्कार कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 200 करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में ऊना के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी को राहत नहीं मिली है। अदालत ने उन्हें नियमित जमानत देने से इन्कार कर दिया है। पंजाब के नवांशहर निवासी हितेश गांधी ने नियमित जमानत के लिए आवेदन दायर किया था।
इस पर सुनवाई करते हुए जिला अदालत शिमला के न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने कहा कि आवेदक धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत आवश्यक दो शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है।अदालत ने कहा कि ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह माना जा सके कि आवेदक धन शोधन के अपराध का दोषी नहीं है। साथ ही यह संभावना भी है कि यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है या सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है।
अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों, पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध में आरोपी की संलिप्तता, गबन की गई छात्रवृत्ति राशि और मामले के वर्तमान चरण को ध्यान में रखते हुए कहा कि आवेदक जमानत पर रिहाई का हकदार नहीं है। आवेदक की ओर से यह दलील दी गई थी कि उसके खिलाफ पूरी कार्यवाही, विशेष रूप से गिरफ्तारी और निरंतर कारावास, कानून के विपरीत है। उसने बताया कि वह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत ने सभी दलीलों को सुनने के बाद जमानत आवेदन को खारिज कर दिया।
यह मामला पोस्ट मैट्रिक योजना के अंतर्गत एसटी/एससी/ओबीसी छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति से जुड़ा है। साल 2013 से 2018 के बीच यह घोटाला हुआ। इसमें 22 निजी शैक्षणिक संस्थान शामिल पाए गए। ईडी के अनुसार आरोपी हितेश केवल दो संस्थानों (पंडोगा और नवाशहर स्थित केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस) में शामिल था।