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HP High Court: हिमाचल में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, जानें क्या कहा
Sat, 06 Dec 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 06 Dec 2025 02:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सेवा प्रदाताओं की ओर से राज्य में इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की। जिसमें अदालत ने कनेक्टिविटी को शीघ्रता से बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी गांव में इंटरनेट सुविधाओं को मुहिया करवाने पर संज्ञान लेते हुए कनेक्टिविटी को शीघ्रता से बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है। अदालत ने सेवा प्रदाताओं की ओर से राज्य में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की। उत्तरदाताओं ने अदालत को बताया कि इस संबंध में हिमाचल प्रदेश की राज्य ब्रॉडबैंड समिति (एसबीसी ) की बैठक 12 जून 2025 को हुई थी। आगे की प्रगति की समीक्षा के लिए एक नई बैठक बुलाई जानी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने आगामी होने वाली बैठक के लिए कोर्ट से एक न्याय मित्र नियुक्त किया है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी।
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प्रतिवादी रिलायंस जियो की ओर से दायर हलफनामे में बताया गया कि प्रदेश में 1676 साइटों की संभावना है, जिनमें से 1609 साइटें सेवा के लिए तैयार हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 67 और साइटें जोड़ने की योजना है। ऑपरेटर ने अब तक 3488 संख्या में 4-जी साइटें और 1609 संख्या में 5-जी साइटें स्थापित की हैं। दूसरी ओर बीएसएनएल की ओर से दायर हलफनामे से पता चला कि कुल 1115 गांवों में से 835 गांवों तक सफलतापूर्वक 4-जी कवरेज का विस्तार किया गया है। यह संख्या पिछले आदेश में दर्ज 773 गांवों से अधिक है।
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स्टोन क्रशर की दूरी के मापदंडों पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रामीण आबादी से स्टोन क्रशर की दूरी के संबंध में निर्धारित मानदंडों के कथित उल्लंघन को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने ग्राणीण आबादी से स्टोन क्रशर की दूरी के मापदंडों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में बताया गया है कि हमीरपुर के गलोड़ में एक स्टोन क्रशर स्थापित करने का प्रस्ताव है जो ग्राम आबादी-देह से दूरी के संबंध में 29 जून 2021 की अधिसूचना में निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता ने साइट अप्रेजल कमेटी की 27 सितंबर 2024 की रिपोर्ट के आधार पर दी गई सहमति पर सवाल उठाया है, जिस तारीख से पंजीकरण दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को होगी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रामीण आबादी से स्टोन क्रशर की दूरी के संबंध में निर्धारित मानदंडों के कथित उल्लंघन को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने ग्राणीण आबादी से स्टोन क्रशर की दूरी के मापदंडों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में बताया गया है कि हमीरपुर के गलोड़ में एक स्टोन क्रशर स्थापित करने का प्रस्ताव है जो ग्राम आबादी-देह से दूरी के संबंध में 29 जून 2021 की अधिसूचना में निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता ने साइट अप्रेजल कमेटी की 27 सितंबर 2024 की रिपोर्ट के आधार पर दी गई सहमति पर सवाल उठाया है, जिस तारीख से पंजीकरण दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को होगी।
हाईकोर्ट ने सरकार को दिया एक सप्ताह का अंतिम मौका
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने श्रम कल्याण अधिकारी के पद पर नियमित किए गए कर्मचारियों को उनके नए वेतनमान के अनुसार वेतन न दिए जाने के मामले में सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नियमितीकरण के बावजूद उन्हें अभी भी कॉन्ट्रेक्ट अवधि वाला पुराना वेतन ही मिल रहा है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने इस मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर मामले में उचित निर्देश प्राप्त करें और स्पष्टीकरण दे कि नियमितीकरण के बावजूद नया वेतन जारी क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
याचिकाकर्ताओं को शुरुआत में अनुबंध आधार पर श्रम कल्याण अधिकारी, क्लास-II (राजपत्रित) के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के अनुसार, लेवल-16 के पहले सेल का 60 फीसदी यानी 29,220 प्रति माह का निश्चित अनुबंध मानदेय मिल रहा था।7 जुलाई 2025 को उनकी सेवाओं को 10,300-34,800 के पे बैंड में 5,000 ग्रेड पे के साथ नियमित किया गया था, जो लेवल-16 के वेतन मैट्रिक्स के बराबर है।कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण के बावजूद, उन्हें अभी भी अनुबंध पर मिलने वाला पुराना वेतन 29,220 ही दिया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने श्रम कल्याण अधिकारी के पद पर नियमित किए गए कर्मचारियों को उनके नए वेतनमान के अनुसार वेतन न दिए जाने के मामले में सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नियमितीकरण के बावजूद उन्हें अभी भी कॉन्ट्रेक्ट अवधि वाला पुराना वेतन ही मिल रहा है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने इस मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे एक सप्ताह के भीतर मामले में उचित निर्देश प्राप्त करें और स्पष्टीकरण दे कि नियमितीकरण के बावजूद नया वेतन जारी क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
याचिकाकर्ताओं को शुरुआत में अनुबंध आधार पर श्रम कल्याण अधिकारी, क्लास-II (राजपत्रित) के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के अनुसार, लेवल-16 के पहले सेल का 60 फीसदी यानी 29,220 प्रति माह का निश्चित अनुबंध मानदेय मिल रहा था।7 जुलाई 2025 को उनकी सेवाओं को 10,300-34,800 के पे बैंड में 5,000 ग्रेड पे के साथ नियमित किया गया था, जो लेवल-16 के वेतन मैट्रिक्स के बराबर है।कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण के बावजूद, उन्हें अभी भी अनुबंध पर मिलने वाला पुराना वेतन 29,220 ही दिया जा रहा है।