हिमाचल: हाईकोर्ट ने कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन परियोजना के काम में तेजी लाने के दिए निर्देश
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और निजी ठेकेदार कंपनियों को काम में तेजी लाने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन परियोजना में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई और निजी ठेकेदार कंपनियों को काम में तेजी लाने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी के निदेशक सुनील कुलकर्णी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से कुछ ऐसी प्रतिबद्धताएं पूरी की जानी बाकी हैं, जो उनके निर्माण क्षेत्र की सीमा से बाहर है। इस वजह से काम रुका हुआ है और इसे ठीक करना एनएचएआई की जिम्मेदारी है। इस पर कंपनी के वकील ने कोर्ट से समय मांगते हुए कहा कि वे एक व्यापक हलफनामा दायर करेंगे। इसमें उन सभी दिक्कतों और एनएचएआई को भेजे गए अनुरोध पत्रों का पूरा रिकॉर्ड दिया जाएगा, ताकि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सके।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग, मंडी के अधीक्षण अभियंता का हलफनामा पेश किया। इसमें बताया गया कि दियोड के पास क्षतिग्रस्त हुई 200 मीटर सड़क को बहाल कर दिया गया है। इस काम के लिए एनएचएआई की ओर से 5,51,13,973 स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 50 फीसदी राशि 2,75,56,986 जारी हो चुकी है। खंडपीठ ने निर्माण कार्य में सुस्ती के कारण पर्यटकों और स्थानीय जनता को पिछले 5 वर्षों से हो रही भारी परेशानी पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।अदालत ने एनएचएआई और ठेकेदारों की सुस्त कार्यप्रणाली पर असंतोष जताते हुए उत्तरदाता कंपनी के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मानसून की शुरुआत से पहले सभी संवेदनशील और क्षतिग्रस्त हिस्सों को हर हाल में दुरुस्त कर यातायात के अनुकूल बनाया जाए।
देरी से काम पूरा करने वाली कंपनी को माफी, लेकिन देना होगा 1 लाख जुर्माना
कोर्ट ने प्रतिवादी कंपनी द्वारा दायर अवमानना से जुड़े एक आवेदन पर भी फैसला सुनाया। इस कंपनी को जुलाई 2024 तक काम पूरा करने का समय दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2024 तक बढ़ाया था। चूंकि कंपनी ने बदले हुए प्रोजेक्ट स्कोप के तहत काम पूरा कर लिया है, इसलिए अवमानना की कार्रवाई को आगे बढ़ाने का कोई फायदा नहीं है।हाईकोर्ट ने टिप्पणियां करते हुए कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि काम पूरा हो ताकि आम जनता को असुविधा न हो। चूंकि काम भले ही देरी से पूरा हो चुका है, इसलिए हम इस शर्त पर राहत दे रहे हैं कि कंपनी को एक महीने के भीतर हाईकोर्ट एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन फंड में एक लाख रुपये का जुर्माना जमा करना होगा।