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HP High Court: हिमाचल हाईकोर्ट के निर्देश- विस्थापन समस्या दशकों पुरानी, राजस्थान सरकार फिर करे विचार
Sat, 29 Nov 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 29 Nov 2025 05:00 AM IST
सार
दशकों पुरानी विस्थापन समस्या की परेशानी को देखते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल से दस्तावेज मिलने के बाद राजस्थान सरकार को फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दशकों पुरानी विस्थापन समस्या की परेशानी को देखते हुए एक अहम आदेश पारित किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने हिमाचल से दस्तावेज मिलने के बाद राजस्थान सरकार को फिर से विचार करने का निर्देश दिया है।
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अदालत ने प्रतिवादी कांगड़ा के तहसील फतेहपुर डिप्टी कमिश्नर (आर एंड आर) राजा का तालाब को निर्देश दिया है कि वे राजस्थान राज्य की ओर से 26 अगस्त 2025 के संचार के माध्यम से मांगी गई आवश्यक जानकारी चार सप्ताह के भीतर प्रदान करें। दस्तावेज प्राप्त होने के बाद,राजस्थान राज्य के सक्षम प्राधिकारी को छह सप्ताह की अवधि के भीतर इस मुद्दे पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि अंतिम आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता आवेदक को उचित नोटिस दिया जाए और उसे सुना जाए। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी।
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याचिकाकर्ता 1960 के दशक से विस्थापन के संबंध में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। अदालत ने पाया कि राजस्थान राज्य ने 24 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ता के दावे को केवल इस आधार पर खारिज कर दिया था कि 0.15 मरला भूमि का म्यूटेशन राम अवतार, पुत्र राजा राम के नाम 14 सितंबर 1967 को दर्ज हुआ था, जबकि अधिग्रहण 31 मार्च 1961 को हुआ था। इस आधार पर याचिकाकर्ता को पात्र नहीं माना गया।न्यायालय को यह जानकारी दी गई कि इस आदेश को पारित करने से पहले, राजस्थान राज्य ने स्वयं 26 अगस्त 2025 को हिमाचल प्रदेश राज्य से जानकारी मांगी थी और हिमाचल प्रदेश के डिप्टी कमिश्नर राजा-का-तालाब ने 16 सितंबर 2025 को दस्तावेजों की आपूर्ति के लिए कुछ समय मांगा था।
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