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हैकिंग से बचना सीखा, और हैकर बन गए
अमर उजाला, शिमला
Updated Thu, 20 Feb 2014 11:39 AM IST
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बीएसएनएल की वेबसाइट हैक करने वाले इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने अक्तूबर माह में साइबर क्राइम को लेकर एक सेमिनार में भाग लिया था। सेमिनार में साइबर विशेषज्ञों ने वेबसाइट को हैक करने और हैकर्स से बचने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। यहीं से इन दो आरोपी छात्रों ने कोई साइट हैक कर शार्टकट तरीके से पैसा कमाने की ठान ली।
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आरोपियों ने वेबसाइट हैक करने के फार्मूले बताने वाली एक साइट से अपने इंटरनेट अकाउंट बनाए और डाटा इंफोसिस की ई - प्रोसेस को हैक कर दिया। इस बात का खुलासा आरोपियों ने पुलिस पूछताछ के दौरान किया है। आरोपी छात्रों को पकड़े जाने का भी डर था, लिहाजा वह संजौली स्थित एक साइबर कैफे का इस्तेमाल करते थे। इसी साइबर कैफे से लोगों को रिचार्ज बेचा करते थे।
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साइबर कैफे में बैठकर इंटरनेट से दोनों छात्र डाटा इंफोसिस का अकाउंट ऑन लाइन हैक कर देते थे। जयपुर पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद डाटा इंफोसिस लिमिटेड के ई. प्रोसेस से जिन मोबाइल उपभोक्ताओं के प्रीपेड रिचार्ज किए उन मोबाइल नंबरों को ट्रेस करना शुरू कर दिया।
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मोबाइल नंबर से इनके घरों का पता चला, बात करने पर सभी रिचार्ज करवाने वाले उपभोक्ताओं ने इन छात्रों के बारे में बताया। यहीं से दोनों आरोपी छात्र जयपुर पुलिस की राडार पर आ गए। एक हजार का रिचार्ज तीन से चार सौ में कर देते थे। जयपुर पुलिस ने साक्ष्य जुटाने के बाद छात्र कुलश्रेष्ठ वर्मा और हार्दिक को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि इन्होंने सोलह लाख के रिचार्ज बेचे हैं। मौजूदा समय में जयपुर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।