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हिमाचल: फर्जी आईजी बनकर वसूली मामले में हरियाणा पुलिस के पांच कर्मी दोषमुक्त

Sat, 18 Apr 2026 12:16 PM IST
Krishan Singh दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)।
दीपक मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, नाहन (सिरमौर)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 18 Apr 2026 12:16 PM IST
सार

 अदालत ने राज्य सरकार की रिवीजन (पुनरीक्षण) याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब किसी मामले की एफआईआर पूरी तरह रद्द हो जाती है, तो उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाही स्वतः समाप्त मानी जाएगी।

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Himachal: Five Haryana Police personnel acquitted in extortion case posing as fake IG
अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उद्योगपतियों से कथित वसूली के बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने हरियाणा पुलिस के पांच कर्मियों को दोषमुक्त करार दिया है। अदालत ने राज्य सरकार की रिवीजन (पुनरीक्षण) याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि जब किसी मामले की एफआईआर पूरी तरह रद्द हो जाती है, तो उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाही स्वतः समाप्त मानी जाएगी। इस फैसले से केके मिश्रा (चंडीगढ़), आलोक रॉय (चंडीगढ़), रविंदर सिंह (अंबाला), जसवीर सिंह (शाहाबाद) और राज सिंह (झज्जर) निवासी को राहत मिली है। यह मामला साल 2022 में शिमला स्थित सीआईडी थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

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आरोप था कि मुख्य आरोपी विनय अग्रवाल ने खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का आईजी (पुलिस महानिरीक्षक) बताकर उद्योगपतियों को झांसा दिया। आरोप था कि वह हरियाणा पुलिस के कर्मियों और सुरक्षा गार्डों के साथ कालाअंब और बद्दी के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर हथियारों के माध्यम से दबाव बनाकर उगाही करता था। जांच में सामने आया कि आरोपियों से मिलकर करीब 2,38,70,400 रुपये की वसूली की। जांच एजेंसी के अनुसार तलाशी के दौरान मुख्य आरोपी से 7.25 लाख नकद, 6,717 अमेरिकी डॉलर और आईपीएस मार्किंग पुलिस की लाठी बरामद किए जाने का दावा किया गया। इसी बीच हिमाचल पुलिस ने इस मामले में एसपी साइबर और एसपी सीआईडी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर मामले की जांच की।

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हालांकि, वर्ष 2023 में मुख्य आरोपी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जनवरी 2025 में हाईकोर्ट ने कहा कि मामला उधार लेन-देन (सिविल विवाद) से जुड़ा है और आपराधिक रंग देना कानून का दुरुपयोग है। इसलिए पूरी एफआईआर को ही रद्द (क्वैश) कर दिया था। इसी फैसले के आधार पर नाहन ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया था। अब इसी आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में रिवीजन याचिका दायर की है। राज्य सरकार ने दलील दी कि एफआईआर सिर्फ एक आरोपी के लिए रद्द हुई है, बाकी आरोपियों के खिलाफ केस जारी रहना चाहिए। अब सेशन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक घटना से जुड़े आरोप अलग-अलग नहीं चल सकते हैं। न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने राज्य सरकार की रिवीजन याचिका को खारिज कर दिया। 

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