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Himachal Pradesh: मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- पानी सप्लाई की होगी निगरानी, 291 पेयजल स्कीमों में लगेंगे सेंसर
Sun, 15 Jun 2025 10:28 AM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 15 Jun 2025 10:28 AM IST
सार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हर जिले के एक क्षेत्र को सप्ताह भर चौबीस घंटे पेयजल आपूर्ति प्रणाली के तहत चिह्नित करेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पीने का पानी लोगों के घरों तक पहुंचा या नहीं, अब इसकी जानकारी सेंसर देंगे। प्रदेश के 10 जिलों की 291 योजनाओं में यह सेंसर लगाए जाएंगे। इससे रियल टाइम पानी की आपूर्ति की निगरानी होगी। यह प्रणाली किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर सभी जिलों में लगाई जाएगी। सीएम सुक्खू ने कहा कि पेयजल की शुद्धता की जांच के लिए राज्यस्तरीय और 14 जिलास्तरीय एनएबीएल-मान्यता प्राप्त जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित होंगी। अब तक राज्य में कुल 71 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं।
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शनिवार को शिमला से जारी बयान में सुक्खू ने कहा कि हर जिले के एक क्षेत्र को सप्ताह भर चौबीस घंटे पेयजल आपूर्ति प्रणाली के तहत चिह्नित करेंगे। रामपुर, चंबा में भूमिगत जलापूर्ति योजना, नालागढ़, घुमारवीं और नादौन में उठाऊ पेयजल आपूर्ति योजना के कार्य प्रगति पर हैं। 23 शहरों में जलापूर्ति योजनाओं के उन्नयन कार्य चल रहे हैं। इस वित्त वर्ष में 9 परियोजनाओं के कार्य शुरू किए जाएंगे। नेरवा, चिड़गांव, कंडाघाट और टाहलीवाल की पेयजल परियोजनाओं का उन्नयन होगा। बर्फ वाले जनजातीय क्षेत्रों में एंटी फ्रीज पाइप लगेंगे। राज्य सरकार ने प्रथम चरण में 80 करोड़ रुपये के व्यय के साथ मुख्यमंत्री स्वच्छ जल शोधन योजना शुरू करने का निर्णय लिया है।
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इससे ओजोनेशन, यूवी फिल्टरेशन, आरओ और नैनो फिल्टरेशन जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर जल शोधन से लोगों को स्वच्छ जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे जल जनित बीमारियों में कमी आएगी और जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा। इस वित्त वर्ष के दौरान प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में लाहौल स्पीति के लिए 27 करोड़ रुपये की लागत से 20 पेयजल आपूर्ति योजनाओं और किन्नौर जिला में 72 करोड़ रुपये की लागत से 6 पेयजल आपूर्ति योजनाओं का काम शुरू किया जाएगा। इन पेयजल योजनाओं में एंटी फ्रीज पाइप का प्रयोग किया जाएगा।
17 शहरों में चल रहा पेयजल परियोजनाओं पर काम
इस वर्ष नादौन, भोरंज, अमलैहड़ और हरोली में चार पेयजल आपूर्ति योजनाओं एवं बद्दी में एक सीवरेज स्कीम का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। 298 करोड़ 87 लाख रुपये की अनुमानित लागत से मंडी, ठियोग, चंबा, हमीरपुर, डलहौजी और पालमपुर जैसे 17 नगरों में पेयजल परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। भुंतर, नाहन, ज्वाली, अर्की, निरमंड, जोगिंद्रनगर, शाहपुर, भटियात और करसोग में 167 करोड़ रुपये की पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी, जसवां, परागपुर और देहरा में 43 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। कांगड़ा, मंडी, चंबा और किन्नौर के 14 कस्बों में सीवरेज योजनाओं का कार्य शुरू किया जाएगा।
इस वर्ष नादौन, भोरंज, अमलैहड़ और हरोली में चार पेयजल आपूर्ति योजनाओं एवं बद्दी में एक सीवरेज स्कीम का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। 298 करोड़ 87 लाख रुपये की अनुमानित लागत से मंडी, ठियोग, चंबा, हमीरपुर, डलहौजी और पालमपुर जैसे 17 नगरों में पेयजल परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। भुंतर, नाहन, ज्वाली, अर्की, निरमंड, जोगिंद्रनगर, शाहपुर, भटियात और करसोग में 167 करोड़ रुपये की पेयजल योजनाओं का निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। कांगड़ा जिला के ज्वालामुखी, जसवां, परागपुर और देहरा में 43 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल उपचार संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। कांगड़ा, मंडी, चंबा और किन्नौर के 14 कस्बों में सीवरेज योजनाओं का कार्य शुरू किया जाएगा।
संप्रभुता और अखंडता को खतरा हो सकता है। हस्तक्षेप आवेदन में मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि यह कानून संसद से अधिनियमित है, यह भारतीय जनता के जनादेश को दर्शाता है।