Himachal Apple Season: सेब की ग्रेडिंग-पैकिंग महंगी, कुछ किस्मों में लागत भी नहीं मिल रही, जानें विस्तार से
हिमाचल प्रदेश में समर क्वीन, रेड गोल्डन, टाइडमैन जैसी कम कीमत पर बिकने वाली किस्मों में सेब बागवानों की लागत भी पूरी नहीं हो रही है। पढ़ें पूरी खबर...
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राज्य में पिछले कुछ समय से सेब की फसल को तैयार करने और इसे मार्केट तक पहुंचाने की लागत बहुत अधिक बढ़ चुकी है। हर पंद्रह से बीस दिन में फफूंदनाशकों, सूक्ष्म पोषक तत्वों आदि का छिड़काव करना होता है। 200 लीटर दवा का छिड़काव करना हो तो 1200 से 2000 रुपये तक का खर्च आ जाता है। 200 लीटर छिड़काव 40 से 50 पेड़ों में ही खप जाता है। फसल तैयार हो जाए तो उसके बाद इसके तुड़ान से लेकर इसे पैक करने और इसके परिवहन में बड़ा खर्च आ रहा है। ठियोग में पैकिंग मशीन के मालिक सोनू शर्मा ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से प्रति पेटी पैकिंग के 220 रुपये दाम ही ले रहे हैं। उन्होंने इस बार दाम नहीं बढ़ाए हैं। कोटखाई निवासी तारा दत्त ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने प्रति पेटी पैकिंग के 200 रुपये दिए।
इस बार उनसे 220 रुपये मांगे जा रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में तो यह दाम 230 रुपये प्रति पेटी भी कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इस तरह के भरान में कार्टन, ट्रे, ग्रेडिंग, पैकिंग मशीन मालिकों की रहती है। बागवानों को अपनी क्रेट में ही सेब पहुंचाना होता है। दूसरी ओर ओलों से दागी हुए फल सस्ते भाव बिकने से भी सेब बागवानों को नुकसान हो रहा है।
पिछले वर्ष तक भरानी मजदूर 800 रुपये तक की दिहाड़ी ले रहे थे, मगर इस बार इसके 50 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। सेब का भरान करने वाले संतराम ने बताया कि पिछले कई वर्षों से 800 रुपये की दिहाड़ी ही चल रही थी, मगर इस बार 850 रुपये प्रतिदिन लिए जा रहे हैं।
कार्टन के रेट 60 से 65 रुपये तक लिए जा रहे हैं, जबकि ट्रे का एक बंडल 600 से 700 रुपये तक बेचा जा रहा है। कार्टन सेब की पेटी के बाहर के कवर को कहते हैं, जबकि ट्रे भीतर जिसमें सेब रखा जाता है, उसे कहा जाता है। हालांकि, हाफ बॉक्स 40 से 45 रुपये तक बिक रहा है।