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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   High Court takes a stern view of the devastation in Tangti Khad; orders Kinnaur DC to appear in court in perso

Shimla: तांगती खड्ड में तबाही पर हाईकोर्ट सख्त, डीसी किन्नौर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश

Wed, 15 Jul 2026 08:03 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 15 Jul 2026 08:03 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में तांगती खड्ड को साफ करने और मलबा हटाने के अपने आदेशों का पालन न होने पर कड़ा संकोच और नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रशासन के रवैये को देखते हुए अब सीधे जिले के प्रशासनिक मुखिया को तलब कर जवाब मांगा है।

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High Court takes a stern view of the devastation in Tangti Khad; orders Kinnaur DC to appear in court in perso
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने किन्नौर जिले में तांगती खड्ड को साफ करने और मलबा हटाने के अपने आदेशों का पालन न होने पर कड़ा संकोच और नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने प्रशासन के रवैये को देखते हुए अब सीधे जिले के प्रशासनिक मुखिया को तलब कर जवाब मांगा है। डीसी किन्नौर को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद नदी को साफ करने के लिए पर्याप्त मशीनरी क्यों नहीं तैनात की गई। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

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अदालत ने पाया कि 16 अक्तूबर 2025 को ही निर्देश दिए गए थे कि साइट पर सिर्फ एक जेसीबी से काम नहीं चलेगा और डीसी किन्नौर को ज्यादा मशीनें तैनात करने के आदेश दिए गए थे। हालांकि, हाल ही में लोक निर्माण विभाग रामपुर सर्कल के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर की ओर से दाखिल हलफनामे से साफ हुआ कि सितंबर 2025 में सिर्फ एक निजी पोकलेन को केवल 40 घंटों के लिए इस्तेमाल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि साल भर में स्थिति और खराब हो गई है, जो सीधे तौर पर अदालती आदेशों की अवहेलना है। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने अदालत के समक्ष 9 और 10 जुलाई को आई हालिया अचानक आई बाढ़ की तस्वीरें पेश की। इन तस्वीरों को देखकर कोर्ट ने चिंता जताई कि मलबा न हटाने के कारण पुल पूरी तरह से मलबे में दबकर डूब गया है और खड्ड के किनारे बनी इमारतों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है।
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