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Hamirpur (Himachal) News: यशपाल साहित्य परिषद ने किया भवन परिसर को ई लाइब्रेरी न बनाने का आग्रह
Thu, 09 Oct 2025 01:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 09 Oct 2025 01:03 AM IST
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नादौन (हमीरपुर)। यशपाल साहित्य परिषद की बैठक बुधवार को नादौन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डॉ. रत्न चंद शर्मा ने की।
बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. रत्न चंद रत्नाकर तथा जिला भाषा अधिकारी संतोष पटियाल भी उपस्थित रहे। साहित्यकारों ने जिला भाषा अधिकारी संतोष पटियाल से अपनी समस्या को रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस भवन परिसर के स्थान पर ई-लाइब्रेरी बनाने की कवायद चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो इस सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व ही मिट जाएगा।
उन्होंने कहा कि भवन परिसर तथा इसमें उपलब्ध धरोहरों को संजोने के लिए प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकारों एवं प्रख्यात लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में इस वर्ग का साहित्य प्रतिष्ठान के साथ आज भी भावनात्मक संबंध जुड़ा हुआ है। यहां पर दुर्लभ पांडुलिपियों, पुस्तकें, स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों के दुर्लभ चित्र सहेज कर रखे गए हैं, जो प्रदेश में अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं हैं।
इस सदन की परिकल्पना में शिक्षाविद, साहित्यकार और पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. नारायणचंद पराशर, पूर्व विधायक एवं प्रख्यात लेखक प्रेमदास पखरोलवी सहित कई अन्य प्रख्यात लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान समय में क्षेत्र भर में कहीं ऐसी कोई सुविधा न होने के कारण आज भी रोजाना काफी संख्या में बच्चे, शोधार्थी तथा लेखन से जुड़े अन्य लोग संस्थान में पढ़ने आते हैं।
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उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि प्रतिष्ठान के अस्तित्व को यथारूप ही रखा जाए तथा यहां रात को ठहरने की व्यवस्था के साथ साथ दुर्लभ चित्रों तथा अन्य साहित्यिक सामग्री को सहेजने के लिए एक आर्ट गैलरी और सभागार का निर्माण करवाया जाए। इस दौरान विवेक शर्मा सहित अन्य सदस्य एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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बैठक में परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. रत्न चंद रत्नाकर तथा जिला भाषा अधिकारी संतोष पटियाल भी उपस्थित रहे। साहित्यकारों ने जिला भाषा अधिकारी संतोष पटियाल से अपनी समस्या को रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि इस भवन परिसर के स्थान पर ई-लाइब्रेरी बनाने की कवायद चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो इस सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व ही मिट जाएगा।
उन्होंने कहा कि भवन परिसर तथा इसमें उपलब्ध धरोहरों को संजोने के लिए प्रदेश के प्रसिद्ध साहित्यकारों एवं प्रख्यात लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ऐसे में इस वर्ग का साहित्य प्रतिष्ठान के साथ आज भी भावनात्मक संबंध जुड़ा हुआ है। यहां पर दुर्लभ पांडुलिपियों, पुस्तकें, स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों के दुर्लभ चित्र सहेज कर रखे गए हैं, जो प्रदेश में अन्यत्र कहीं भी उपलब्ध नहीं हैं।
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इस सदन की परिकल्पना में शिक्षाविद, साहित्यकार और पूर्व शिक्षा मंत्री प्रो. नारायणचंद पराशर, पूर्व विधायक एवं प्रख्यात लेखक प्रेमदास पखरोलवी सहित कई अन्य प्रख्यात लेखकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्तमान समय में क्षेत्र भर में कहीं ऐसी कोई सुविधा न होने के कारण आज भी रोजाना काफी संख्या में बच्चे, शोधार्थी तथा लेखन से जुड़े अन्य लोग संस्थान में पढ़ने आते हैं।
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उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि प्रतिष्ठान के अस्तित्व को यथारूप ही रखा जाए तथा यहां रात को ठहरने की व्यवस्था के साथ साथ दुर्लभ चित्रों तथा अन्य साहित्यिक सामग्री को सहेजने के लिए एक आर्ट गैलरी और सभागार का निर्माण करवाया जाए। इस दौरान विवेक शर्मा सहित अन्य सदस्य एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।