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Hamirpur (Himachal) News: व्हील चेयर टूटीं, पंखे खराब, फर्श पर बैठने के लिए मजबूर मरीज
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मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ओपीडी, वार्ड से लेकर कार्यालय तक बदहाल
अधूरे स्टाफ के बावजूद डाॅक्टर के ओपीडी में बैठने की पर्याप्त सुविधा तक नहीं
मरीज और तीमारदार भी ओपीडी के बाहर फर्श पर बैठने को विवश
निर्माणाधीन कैंपस में प्रथम चरण का कार्य 31 जुलाई बीतने पर भी अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मुख्यमंत्री सुक्खू के गृह जिले के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में अव्यवस्थाओं से मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है। पूर्व भाजपा सरकार में इस कॉलेज की दुर्दशा को कांग्रेस ने खूब मुद्दा बनाया था लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार में लोगों को मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल सरीखी सेवाएं भी नहीं मिल पा रही है। कारण है अस्पताल में जगह और सुविधाओं की कमी। जोलसप्पड़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के प्रथम चरण का कार्य पूरा करने के लिए इस साल तीसरी बार बढ़ाई गई डेडलाइन भी पूरी हो चुकी है। यहां पर मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के दौरे और निर्देशों का कोई असर नहीं हुआ है।
250 डाॅक्टरों के पद मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सृजित हैं लेकिन 170 के करीब डाॅक्टर सेवाएं दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ओपीडी में डाॅक्टर तो हैं लेकिन बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है। तीन से चार डाॅक्टर एक मेज पर बैठकर मरीजों की जांच कर रहे हैं। इतना ही नहीं ओपीडी के बाहर मरीज फर्श पर बैठने को विवश है। वार्ड के बाहर बरामदों में बैठने की व्यवस्था तक नहीं और पंखे भी खराब पड़े हैं। सिर्फ अस्पताल की ओपीडी और वार्डों में ही अव्यवस्था का आलम नहीं है बल्कि कार्यालय में लिपिकीय स्टाफ का टोटा है। इससे कार्यालयों में कार्य प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में स्ट्रेचर, व्हील चेयर टूटे हुए हैं। कुल मिलाकर आधे अधूरे स्टाफ से चल रहे मेडिकल कॉलेज में ओपीडी, वार्ड से लेकर कार्यालय तक स्थिति बदहाल है।
महज एक एंबुलेंस से चल रहा गुजारा
मेडिकल कॉलेज में हर दिन की ओपीडी 1500 के करीब है। कई मरीज हर दिन शिमला, टांडा चंडीगढ़ के लिए रेफर होते हैं लेकिन महज एक एंबुलेंस के सहारे यहां पर कार्य चलाया जा रहा है। बीते वर्ष एक एंबुलेंस खराब हो चुकी है।
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ये है स्टाफ की स्थिति
मेडिकल कॉलेज में कुल 250 डाॅक्टरों के पद सृजित है। इनमें से 170 डाॅक्टर सेवाएं दे रहे हैं। इन डाॅक्टरों में 70 के करीब नॉन क्लीनिकल हैं जो मेडिकल स्टूडेंट को पढ़ाने का कार्य करते हैं। ओपीडी में 100 के लगभग डाॅक्टर सेवाएं दे रहे हैं। 150 नर्स और वार्ड सिस्टर सेवारत हैं जबकि पैरा मेडिकल स्टाफ में 70 कर्मी कार्यरत हैं। लिपिकीय स्टाफ में 73 पद सृजित हैं जबकि 25 पद भरे हैं।
कोट
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्राचार्य डा़ॅ रमेश भारती ने कहा कि निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के प्रथम चरण का कार्य जारी है। 31 जुलाई तक कार्य आखिर क्यों पूरा नहीं हुआ, वह इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।
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अधूरे स्टाफ के बावजूद डाॅक्टर के ओपीडी में बैठने की पर्याप्त सुविधा तक नहीं
मरीज और तीमारदार भी ओपीडी के बाहर फर्श पर बैठने को विवश
निर्माणाधीन कैंपस में प्रथम चरण का कार्य 31 जुलाई बीतने पर भी अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मुख्यमंत्री सुक्खू के गृह जिले के मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में अव्यवस्थाओं से मरीजों का मर्ज बढ़ रहा है। पूर्व भाजपा सरकार में इस कॉलेज की दुर्दशा को कांग्रेस ने खूब मुद्दा बनाया था लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार में लोगों को मेडिकल कॉलेज में जिला अस्पताल सरीखी सेवाएं भी नहीं मिल पा रही है। कारण है अस्पताल में जगह और सुविधाओं की कमी। जोलसप्पड़ में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के प्रथम चरण का कार्य पूरा करने के लिए इस साल तीसरी बार बढ़ाई गई डेडलाइन भी पूरी हो चुकी है। यहां पर मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के दौरे और निर्देशों का कोई असर नहीं हुआ है।
250 डाॅक्टरों के पद मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सृजित हैं लेकिन 170 के करीब डाॅक्टर सेवाएं दे रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि ओपीडी में डाॅक्टर तो हैं लेकिन बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं है। तीन से चार डाॅक्टर एक मेज पर बैठकर मरीजों की जांच कर रहे हैं। इतना ही नहीं ओपीडी के बाहर मरीज फर्श पर बैठने को विवश है। वार्ड के बाहर बरामदों में बैठने की व्यवस्था तक नहीं और पंखे भी खराब पड़े हैं। सिर्फ अस्पताल की ओपीडी और वार्डों में ही अव्यवस्था का आलम नहीं है बल्कि कार्यालय में लिपिकीय स्टाफ का टोटा है। इससे कार्यालयों में कार्य प्रभावित हो रहा है। अस्पताल में स्ट्रेचर, व्हील चेयर टूटे हुए हैं। कुल मिलाकर आधे अधूरे स्टाफ से चल रहे मेडिकल कॉलेज में ओपीडी, वार्ड से लेकर कार्यालय तक स्थिति बदहाल है।
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महज एक एंबुलेंस से चल रहा गुजारा
मेडिकल कॉलेज में हर दिन की ओपीडी 1500 के करीब है। कई मरीज हर दिन शिमला, टांडा चंडीगढ़ के लिए रेफर होते हैं लेकिन महज एक एंबुलेंस के सहारे यहां पर कार्य चलाया जा रहा है। बीते वर्ष एक एंबुलेंस खराब हो चुकी है।
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ये है स्टाफ की स्थिति
मेडिकल कॉलेज में कुल 250 डाॅक्टरों के पद सृजित है। इनमें से 170 डाॅक्टर सेवाएं दे रहे हैं। इन डाॅक्टरों में 70 के करीब नॉन क्लीनिकल हैं जो मेडिकल स्टूडेंट को पढ़ाने का कार्य करते हैं। ओपीडी में 100 के लगभग डाॅक्टर सेवाएं दे रहे हैं। 150 नर्स और वार्ड सिस्टर सेवारत हैं जबकि पैरा मेडिकल स्टाफ में 70 कर्मी कार्यरत हैं। लिपिकीय स्टाफ में 73 पद सृजित हैं जबकि 25 पद भरे हैं।
कोट
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्राचार्य डा़ॅ रमेश भारती ने कहा कि निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज के प्रथम चरण का कार्य जारी है। 31 जुलाई तक कार्य आखिर क्यों पूरा नहीं हुआ, वह इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं।