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Hamirpur (Himachal) News: फास्ट फूड की लत से बढ़ रहा वजन, रोग प्रतिरोधक क्षमता हो रही कम
Mon, 30 Jun 2025 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 30 Jun 2025 12:35 AM IST
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हमीरपुर। फास्ट फूड की लत बच्चों को ओवरवेट का शिकार कर रही है। फास्ट फूड खाने से हर उम्र के लोगों की सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। दस से 15 साल के बच्चों पर इसका ज्यादा बुरा असर पड़ रहा है।
बच्चों में जंक फूड की बढ़ती लत से माता-पिता काफी चिंतित हैं। उनके लिए यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है कि बच्चे संतुलित आहार कैसे लें। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और नादौन अस्पताल में ऐसे केस आ रहे हैं। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की बाल रोग ओपीडी के काउंसलर के पास माह में औसतन दस केस आ रहे हैं।
वहींए नादौन अस्पताल में भी रोजाना चार से पांच ऐसे केस आ रहे हैं। इनमें बच्चों की भूख नहीं लगने की शिकायत है। बच्चे ओवरवेट से पीड़ित हैं। जब बारीकी से जांच की जाती है तो अत्याधिक मामलों में कारण फास्ट फूड बन रहा है। इन बच्चों में एसिडिटी, पेट में दर्द, भूख कम लगने वाली परेशानी भी है।
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फास्ट फूड खाने वालों में दस से 15 साल के बच्चे अधिक हैं। इनमे औसत वजन 24 से 40 किलो होना चाहिए, लेकिन इनमें आठ से 12 किलो अधिक मिल रहा है। कई बच्चे सप्ताह में तीन से चार दिन फास्ट फूड खाकर पेट भरते हैं। फास्ट फूड में कई हानिकारक तत्व होते हैं, जो मोटापा बढ़ाते हैं। भूख को कम करते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने से बच्चे ओवरवेट का शिकार होने लगते हैं। इनमें प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है।
चटपटी चीजों से नुकसान अधिक
बच्चों में चिप्स, कुरकुरे, कोल्डड्रिंक और पैकेट बंद फास्ट फूड या अन्य चटपटी चीजें खाने से समस्या बढ़ रही है। इनमें नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। चीनी भी मानक से अधिक होती है। खेलने-कूदने की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। इससे गुर्दे में कैल्शियम जमा हो जाता है, जो बाद में पत्थरी बन जाता है। इन्हें लंबे समय तक खाने से मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बन जाता है। किडनी लिवर की क्षमता भी प्रभावित होती है। फास्ट फूड का अधिक सेवन करने से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव होते हैं। फास्ट फूड में पाए जाने वाले रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।
बॉक्स
संतुलित आहार के लिए योजना आवश्यक
बच्चों को संतुलित आहार मिले, इसके लिए पहले से ही योजना बना लेनी चाहिए। बच्चों के लिए भोजन को आकर्षक और स्वादिष्ट बनाने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता है। बच्चों में शुरुआत से ही अच्छा खाने की आदत डालनी चाहिए। बच्चों को अत्यधिक फल देने चाहिए। डाइट में कम फैट लेना चाहिए। बच्चों को रोजाना एक घंटे तक खेलने देना चाहिए।
कोट
फास्ट फूड का ज्यादा सेवन बच्चों को बीमार कर सकता है। कई अभिभावक अपने बच्चों के साथ काउंसलिंग के लिए आते हैं। बच्चे बाहर फास्ट फूड खा लेते हैं। घर आकर कुछ नहीं खाते हैं। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि बच्चों को संतुलित भोजन दें।
-रविंद्र सिंह, काउंसलर, बाल रोग ओपीडी मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर
फास्ट फूड के सेवन से शरीर में न्यूट्रीशियन की कमी होती है। बीपी बढ़ सकता है। ओवरवेट का शिकार हो सकते हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
-डॉ. विवेक वर्मा, एमओ, सुजानपुर अस्पताल
नादौन अस्पताल में भी कई केस आते हैं। इनमें अभिभावकों की शिकायत रहती हैं कि बच्चे भोजन नहीं कर रहे हैं। फास्ट फूड पर अत्याधिक निर्भरता कई बीमारियों का कारण बनती है। गैर संचारी रोगों से पीड़ित होने की अधिक आशंका होती है।
-अरविंद कौंडल, बीएमओ नादौन
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बच्चों में जंक फूड की बढ़ती लत से माता-पिता काफी चिंतित हैं। उनके लिए यह सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है कि बच्चे संतुलित आहार कैसे लें। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर और नादौन अस्पताल में ऐसे केस आ रहे हैं। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज की बाल रोग ओपीडी के काउंसलर के पास माह में औसतन दस केस आ रहे हैं।
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वहींए नादौन अस्पताल में भी रोजाना चार से पांच ऐसे केस आ रहे हैं। इनमें बच्चों की भूख नहीं लगने की शिकायत है। बच्चे ओवरवेट से पीड़ित हैं। जब बारीकी से जांच की जाती है तो अत्याधिक मामलों में कारण फास्ट फूड बन रहा है। इन बच्चों में एसिडिटी, पेट में दर्द, भूख कम लगने वाली परेशानी भी है।
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फास्ट फूड खाने वालों में दस से 15 साल के बच्चे अधिक हैं। इनमे औसत वजन 24 से 40 किलो होना चाहिए, लेकिन इनमें आठ से 12 किलो अधिक मिल रहा है। कई बच्चे सप्ताह में तीन से चार दिन फास्ट फूड खाकर पेट भरते हैं। फास्ट फूड में कई हानिकारक तत्व होते हैं, जो मोटापा बढ़ाते हैं। भूख को कम करते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने से बच्चे ओवरवेट का शिकार होने लगते हैं। इनमें प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है।
चटपटी चीजों से नुकसान अधिक
बच्चों में चिप्स, कुरकुरे, कोल्डड्रिंक और पैकेट बंद फास्ट फूड या अन्य चटपटी चीजें खाने से समस्या बढ़ रही है। इनमें नमक की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। चीनी भी मानक से अधिक होती है। खेलने-कूदने की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। इससे गुर्दे में कैल्शियम जमा हो जाता है, जो बाद में पत्थरी बन जाता है। इन्हें लंबे समय तक खाने से मोटापा, उच्च रक्तचाप और मधुमेह का खतरा बन जाता है। किडनी लिवर की क्षमता भी प्रभावित होती है। फास्ट फूड का अधिक सेवन करने से मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव होते हैं। फास्ट फूड में पाए जाने वाले रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।
बॉक्स
संतुलित आहार के लिए योजना आवश्यक
बच्चों को संतुलित आहार मिले, इसके लिए पहले से ही योजना बना लेनी चाहिए। बच्चों के लिए भोजन को आकर्षक और स्वादिष्ट बनाने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता है। बच्चों में शुरुआत से ही अच्छा खाने की आदत डालनी चाहिए। बच्चों को अत्यधिक फल देने चाहिए। डाइट में कम फैट लेना चाहिए। बच्चों को रोजाना एक घंटे तक खेलने देना चाहिए।
कोट
फास्ट फूड का ज्यादा सेवन बच्चों को बीमार कर सकता है। कई अभिभावक अपने बच्चों के साथ काउंसलिंग के लिए आते हैं। बच्चे बाहर फास्ट फूड खा लेते हैं। घर आकर कुछ नहीं खाते हैं। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि बच्चों को संतुलित भोजन दें।
-रविंद्र सिंह, काउंसलर, बाल रोग ओपीडी मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर
फास्ट फूड के सेवन से शरीर में न्यूट्रीशियन की कमी होती है। बीपी बढ़ सकता है। ओवरवेट का शिकार हो सकते हैं। अभिभावकों को अपने बच्चों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
-डॉ. विवेक वर्मा, एमओ, सुजानपुर अस्पताल
नादौन अस्पताल में भी कई केस आते हैं। इनमें अभिभावकों की शिकायत रहती हैं कि बच्चे भोजन नहीं कर रहे हैं। फास्ट फूड पर अत्याधिक निर्भरता कई बीमारियों का कारण बनती है। गैर संचारी रोगों से पीड़ित होने की अधिक आशंका होती है।
-अरविंद कौंडल, बीएमओ नादौन