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जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी ले सकती है विकराल रूप : डॉ. कमल
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रंगस (हमीरपुर)। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी में फल विज्ञान विभाग की ओर से जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर शनिवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वित्त पोषित हिमालयी कृषि पर एनएफएसआई कार्य दल फेस-2 परियोजना के अंतर्गत यह कार्यशाला हुई। इसमें 40 किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर नेरी कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. कमल शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए इन परिस्थितियों में फसल विविधिकरण अवश्य हो गया है। जलवायु परिवर्तनों के कारण भविष्य में पानी की कमी भी विकराल रूप धारण करने वाली है। इसलिए मौसम की नजाकत को समझते हुए ही किसानों को अब लचीला रुख अपनाना चाहिए। कार्यशाला एवं परियोजना समन्वयक डॉ. विकास शर्मा ने किसानों को आवश्यक सुझाव दिए। डॉ. अनिल धीमान एवं डॉ. यशस्वी ठाकुर ने किसानों को बारीकियों से अवगत करवाया और जागरूकता व जानकारी साझा की।
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उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए इन परिस्थितियों में फसल विविधिकरण अवश्य हो गया है। जलवायु परिवर्तनों के कारण भविष्य में पानी की कमी भी विकराल रूप धारण करने वाली है। इसलिए मौसम की नजाकत को समझते हुए ही किसानों को अब लचीला रुख अपनाना चाहिए। कार्यशाला एवं परियोजना समन्वयक डॉ. विकास शर्मा ने किसानों को आवश्यक सुझाव दिए। डॉ. अनिल धीमान एवं डॉ. यशस्वी ठाकुर ने किसानों को बारीकियों से अवगत करवाया और जागरूकता व जानकारी साझा की।
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