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भोरंज अस्पताल में टीबी लैब तकनीशियन का पद खाली, काम प्रभावित
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भोरंज (हमीरपुर)। सिविल अस्पताल भोरंज में ट्रूनॉट मशीन तो स्थापित है, लेकिन इसे ऑपरेट करने वाले लैब तकनीशियन का पद लंबे समय से खाली है। यहां ट्रूनॉट मशीन को संचालित करने वाले लैब तकनीशियन के अलावा एक अन्य लैब तकनीशियन का पद सृजित है। लेकिन, इन दोनों पदों का काम वर्तमान में मौजूदा एक ही लैब तकनीशियन को करना पड़ रहा है।
ब्लड, शुगर और अन्य टेस्ट करने वाले तकनीशियन को ही टीबी की जांच के लिए बलगम के सैंपलों की जांच करनी पड़ रही है। इससे काम का अत्यधिक बोझ बढ़ गया है। भोरंज अस्पताल का लैब तकनीशियन लंबे समय से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं देता रहा था, लेकिन वर्तमान में उसका हमीरपुर से किसी अन्य अस्पताल में तबादला हो गया है। इससे भोरंज अस्पताल प्रशासन को मजबूरन अस्पताल के एक अन्य कर्मचारी से ये टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
सिविल अस्पताल भोरंज में रोजाना 400 से 450 के करीब ओपीडी है। जबकि, प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों के लैब टेस्ट होते हैं। इसके अलावा सिविल अस्पताल बड़सर, सीएचसी भोटा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिझड़ी से भी टीबी के मरीजों के सैंपल यहां हर रोज आते हैं। यहां स्थापित ट्रूनॉट मशीन की कीमत 20 लाख के करीब बताई जा रही है। इस मशीन में एमडीआर व टीबी के मरीज जिन पर दवा काम नहीं करती, उनकी जांच की जा सकती है।
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पूर्व में इस क्षेत्र के मरीजों के बलगम सैंपल जांच के लिए जिला अस्पताल हमीरपुर ले जाने पड़ते थे। जिले का यह पहला सिविल अस्पताल है, जहां पर इस प्रकार की मशीन लगी है। साथ ही इसमें कोरोना जांच के आरटीपीसीआर टेस्ट भी चिप बदलकर आसानी से हो सकते हैं। लेकिन, यहां पर लैब तकनीशियन न होने के चलते अन्य तकनीशियन पर कार्य का अतिरिक्त बोझ है। वहीं, जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों राजेश शर्मा, प्रदीप ठाकुर और वीरेंद्र कुमार ने खाली पदों को भरने की मांग की है।
कोट्स
लैब तकनीशियन का दो माह पहले तबादला हो गया है और सिविल अस्पताल बड़सर, भोटा और बिझड़ी अस्पताल के भी सैंपल यहीं आते हैं। फिलहाल अन्य कर्मचारी से टेस्ट करवाए जा रहे हैं। ताकि, कार्य सुचारु रूप से चलता रहे। खाली पदों के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
-डॉ ललित कालिया, बीएमओ भोरंज।
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ब्लड, शुगर और अन्य टेस्ट करने वाले तकनीशियन को ही टीबी की जांच के लिए बलगम के सैंपलों की जांच करनी पड़ रही है। इससे काम का अत्यधिक बोझ बढ़ गया है। भोरंज अस्पताल का लैब तकनीशियन लंबे समय से हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं देता रहा था, लेकिन वर्तमान में उसका हमीरपुर से किसी अन्य अस्पताल में तबादला हो गया है। इससे भोरंज अस्पताल प्रशासन को मजबूरन अस्पताल के एक अन्य कर्मचारी से ये टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं।
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सिविल अस्पताल भोरंज में रोजाना 400 से 450 के करीब ओपीडी है। जबकि, प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों के लैब टेस्ट होते हैं। इसके अलावा सिविल अस्पताल बड़सर, सीएचसी भोटा और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिझड़ी से भी टीबी के मरीजों के सैंपल यहां हर रोज आते हैं। यहां स्थापित ट्रूनॉट मशीन की कीमत 20 लाख के करीब बताई जा रही है। इस मशीन में एमडीआर व टीबी के मरीज जिन पर दवा काम नहीं करती, उनकी जांच की जा सकती है।
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पूर्व में इस क्षेत्र के मरीजों के बलगम सैंपल जांच के लिए जिला अस्पताल हमीरपुर ले जाने पड़ते थे। जिले का यह पहला सिविल अस्पताल है, जहां पर इस प्रकार की मशीन लगी है। साथ ही इसमें कोरोना जांच के आरटीपीसीआर टेस्ट भी चिप बदलकर आसानी से हो सकते हैं। लेकिन, यहां पर लैब तकनीशियन न होने के चलते अन्य तकनीशियन पर कार्य का अतिरिक्त बोझ है। वहीं, जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों राजेश शर्मा, प्रदीप ठाकुर और वीरेंद्र कुमार ने खाली पदों को भरने की मांग की है।
कोट्स
लैब तकनीशियन का दो माह पहले तबादला हो गया है और सिविल अस्पताल बड़सर, भोटा और बिझड़ी अस्पताल के भी सैंपल यहीं आते हैं। फिलहाल अन्य कर्मचारी से टेस्ट करवाए जा रहे हैं। ताकि, कार्य सुचारु रूप से चलता रहे। खाली पदों के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
-डॉ ललित कालिया, बीएमओ भोरंज।